ढोडही और तालाब का गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, भैयाथान में फूटा लोगों का गुस्सा
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भैयाथान, सूरजपुर छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता:- सौरभ साहू
हर घर जल योजना के दावों पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
सूरजपुर ACGN:- एक ओर सरकार “हर घर जल” योजना के जरिए गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड से बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां ग्राम गोविंदगढ़, बैजनाथपुर और आमापानी के ग्रामीण आज भी साफ पानी के लिए तरस रहे हैं और मजबूरी में ढोडही, झरिया तथा तालाब का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सिंह ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते क्षेत्र के अधिकांश जलस्रोत सूख चुके हैं। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण हालात इतने खराब हो गए हैं कि आदिवासी परिवार गंदे और मटमैले पानी से अपनी प्यास बुझाने को विवश हैं।
गोविंदगढ़ के ग्रामीण झरिया का दूषित पानी उपयोग कर रहे हैं, जबकि बैजनाथपुर और आमापानी के लोग तालाब के पानी के सहारे जीवन गुजार रहे हैं।



ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के कारण गांव में बीमारी फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे पानी के सेवन से हैजा, कॉलरा, टायफाइड, पीलिया, हेपेटाइटिस, डायरिया और पेचिश जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। सबसे अधिक चिंता बच्चों और बुजुर्गों को लेकर जताई जा रही है, जिनकी तबीयत लगातार प्रभावित हो रही है।
जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सिंह ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र के लोगों के साथ लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं, जबकि धरातल पर ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने साफ कहा कि वे गंदा पानी पीकर जिंदगी जीने को मजबूर हैं और अब उनकी सहनशक्ति जवाब दे रही है।
क्षेत्र के लोगों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विभागीय अमला होने के बावजूद गांवों में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जो बेहद गंभीर स्थिति है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तत्काल टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी बड़ी बीमारी या जनहानि की स्थिति से पहले लोगों को राहत मिल सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन समय रहते जागता है या फिर किसी बड़ी त्रासदी के बाद कार्रवाई की जाती है।
प्रदीप मिश्रा
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