नई तबादला नीति से प्रशासन में कसावट की तैयारी
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ओडिशा, भुवनेश्वर
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता : ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए ओडिशा सरकार ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
भुवनेश्वर ACGN:- ओडिशा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादले और पदस्थापन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नई व्यापक तबादला नीति जारी की है। सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि राज्य में सामान्य रूप से प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल से 15 जून के बीच ही तबादले किए जाएंगे। निर्धारित अवधि के बाहर होने वाले तबादलों के लिए उच्च अधिकारियों की विशेष अनुमति आवश्यक होगी।
सरकार ने माना है कि अब तक विभिन्न विभागों में तबादला नियमों का समान रूप से पालन नहीं होने के कारण कई प्रकार की अनियमितताएं और प्रक्रियागत विसंगतियां सामने आ रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों, अधीनस्थ कार्यालयों और विभागाध्यक्षों को साझा सिद्धांतों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
नई गाइडलाइन के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का सामान्य परिस्थितियों में एक ही स्थान पर तीन वर्ष की सेवा पूर्ण होने के बाद तबादला किया जाएगा। राज्य कैडर के ग्रुप-ए और ग्रुप-बी अधिकारियों को एक ही जिले में छह वर्ष से अधिक समय तक पदस्थ नहीं रखा जाएगा। वहीं ग्रुप-सी कर्मचारियों के लिए एक ही ब्लॉक या तहसील में छह वर्ष से अधिक तक कार्यरत रहने पर रोक लगाई गई है।

सरकार ने संवेदनशील पदों पर तैनाती को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। नई नीति के अनुसार संवेदनशील पदों पर कार्यरत अधिकारियों को सामान्यतः उनके गृह जिले में पदस्थापित नहीं किया जाएगा ताकि प्रशासनिक निष्पक्षता बनी रहे। हालांकि सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों और केबीके क्षेत्रों में लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारियों को निर्धारित शर्तों के आधार पर पसंदीदा अथवा गृह जिले में पदस्थापन की सुविधा देने का प्रावधान रखा है।
नई तबादला नीति में विवाहित कर्मचारियों को भी बड़ी राहत दी गई है। सरकार ने निर्देश दिया है कि जहां तक संभव हो पति-पत्नी को एक ही स्थान या नजदीकी क्षेत्र में पदस्थापित किया जाए ताकि पारिवारिक और सामाजिक संतुलन बना रहे। इसके अलावा सचिवालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में गैर-हस्तांतरणीय सेवाओं के कर्मचारियों को विशेष परिस्थितियों को छोड़कर तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही सीट पर नहीं रखने का भी निर्णय लिया गया है।

राज्य सरकार ने सभी विभागों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि स्थानांतरित कर्मचारियों की समय पर रिलीविंग और ज्वाइनिंग कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि तबादला नियमों में किसी भी प्रकार की छूट केवल जनहित, प्रशासनिक आवश्यकता अथवा विशेष कठिनाई की स्थिति में ही उचित लिखित कारणों के आधार पर दी जा सकेगी। सरकार का मानना है कि नई नीति से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्य संस्कृति में सुधार होगा और सरकारी तंत्र अधिक जवाबदेह बन सकेगा।
प्रदीप मिश्रा
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