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नवागढ़ की प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के लिए सरकार गंभीर, विशेषज्ञ दल करेगा सर्वेक्षण

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता :- सौरभ साहू

5वीं-6वीं शताब्दी की प्रतिमाओं और अवशेषों के वैज्ञानिक अध्ययन के निर्देश, संरक्षण कार्यों की बनेगी योजना

रायपुर ACGN :- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। संस्कृति मंत्री Rajesh Agrawal ने कोंडागांव जिले के नवागढ़ क्षेत्र में मिले प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों को लेकर त्वरित संज्ञान लेते हुए विशेषज्ञ सर्वेक्षण और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार अब इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा को लेकर गंभीरता से कार्य करेगी।
संस्कृति मंत्री ने पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय को निर्देशित किया है कि नवागढ़ क्षेत्र में उपलब्ध प्राचीन प्रतिमाओं और अन्य पुरातात्विक अवशेषों का विशेषज्ञ दल के माध्यम से जल्द स्थल निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि नवागढ़ क्षेत्र में 5वीं और 6वीं शताब्दी ईस्वी से संबंधित प्रतिमाओं और ऐतिहासिक अवशेषों की जानकारी सामने आने के बाद इस क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन बेहद जरूरी हो गया है।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विशेषज्ञ दल क्षेत्र में मौजूद सभी प्रतिमाओं, स्थापत्य अवशेषों, शिल्प कलाकृतियों और संभावित पुरातात्विक स्थलों का सूक्ष्म अध्ययन करे। साथ ही इन धरोहरों का विस्तृत दस्तावेजीकरण भी किया जाए ताकि उनके ऐतिहासिक महत्व का सही आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण और स्थल निरीक्षण से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर आवश्यकतानुसार संरक्षण और सुरक्षा के कार्य शुरू किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में स्थल का ऐतिहासिक महत्व प्रमाणित होता है तो उसे संरक्षित पुरातात्विक स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी पहल की जाएगी। मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन सभ्यताओं, स्थापत्य कला और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से परिपूर्ण रही है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में ऐसे महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं जिनके व्यवस्थित अध्ययन और संरक्षण की आवश्यकता है।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान, संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों की सहभागिता को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि इन धरोहरों का संरक्षण केवल अतीत को सुरक्षित रखने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और इतिहास से जोड़ने का माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पुरातात्विक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षण के साथ-साथ शोध, अध्ययन और सांस्कृतिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी विकसित किया जाए, जिससे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले और स्थानीय लोगों के लिए पर्यटन व रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकें।

प्रदीप मिश्रा
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