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अडानी फाउंडेशन के बांटे सामान पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जनसुनवाई स्थगित

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता:- जिला रिपोर्टर संजय जेठवानी

पेल्मा कोल खदान जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों का उग्र विरोध, प्रलोभन देने का आरोप

रायगढ़ ACGN:- रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक के पेल्मा, उरबा, लालपुर सहित कई गांवों में प्रस्तावित पेल्मा ओपनकास्ट कोल खदान परियोजना को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार तेज होता जा रहा है। जनसुनवाई से ठीक पहले गांवों में माहौल उस समय और गरमा गया जब ग्रामीणों ने कथित रूप से  अडानी फाउंडेशन द्वारा वितरित किए गए कंबल, स्टील पेटियां, छाते और खेल सामग्री को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब उन्हें उनकी जमीन और जनसहमति को प्रभावित करने के उद्देश्य से दिया गया प्रलोभन है।


ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही यह सामान उनके हाथों में पहुंचा वैसे ही उनके भीतर गहरा आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अपनी जमीन, जंगल और आजीविका पर सीधा हमला माना। उनका स्पष्ट कहना है कि उनकी जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी जीवनशैली और अस्तित्व का आधार है, जिसे किसी भी तरह के सामान या प्रलोभन के बदले नहीं दिया जा सकता। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बांटकर उनकी एकजुटता को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वे अब और अधिक संगठित हो चुके हैं।


इसी आक्रोश के बीच कलेक्ट्रेट परिसर के सामने बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए कथित रूप से वितरित किए गए सामानों को सड़क पर फेंक दिया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और युवाओं ने “अडानी भगाओ” जैसे गगनभेदी नारे लगाकर अपना विरोध और अधिक तीव्र कर दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी कि जब तक प्रभावित सभी गांवों के लिए पारदर्शी और समान मुआवजा तय नहीं किया जाता तथा पुनर्वास और रोजगार की स्पष्ट नीति नहीं बनती तब तक किसी भी प्रकार की जनसुनवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।


18 मई 2026 को जनदर्शन के दौरान भी स्थिति काफी गर्म रही जब प्रभावित गांवों के सैकड़ों लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ग्रामीणों ने समान मुआवजा और पुनर्वास के तहत स्थायी रोजगार की मांग को प्रमुखता से रखा और कहा कि यदि उनकी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा।

लगातार बढ़ते जनआक्रोश और विरोध को देखते हुए प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास तेज किए गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी आदेश के तहत 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया। इस निर्णय के बाद परियोजना से जुड़ी प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है और क्षेत्र में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित स्थिति बनी हुई है।


ग्रामीणों ने इस फैसले को अपनी एकजुटता और संघर्ष की जीत बताया है जबकि पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

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