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अमेरिका से लौटेगी छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर ‘अवलोकितेश्वर’ प्रतिमा

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

करीब उन्नीस करोड़ मूल्य की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा फिर सजेगी महंत घासीदास संग्रहालय में, संस्कृति मंत्री ने केंद्र को लिखा पत्र

विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और खुशी की बड़ी खबर सामने आई है। रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से वर्षों पहले चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा अब वापस छत्तीसगढ़ लौटने जा रही है। लगभग उन्नीस करोड़ रुपये मूल्य की यह ऐतिहासिक और अमूल्य प्रतिमा अमेरिका से भारत लाई जा रही है। राज्य सरकार इस धरोहर को फिर से रायपुर संग्रहालय में स्थापित करने की तैयारी में जुट गई है।


पर्यटन, संस्कृति और धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर प्रतिमा को छत्तीसगढ़ वापस भेजने का आग्रह किया है। जानकारी के अनुसार प्रतिमा अभी भारत नहीं पहुंची है, लेकिन उसके भारत पहुंचते ही उसे रायपुर लाने और पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू की जाएगी। संस्कृति मंत्री स्वयं प्रतिमा की प्राप्ति के लिए दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि हाल के वर्षों में अमेरिका ने भारत को करोड़ों रुपये मूल्य की सैकड़ों प्राचीन और ऐतिहासिक कलाकृतियां लौटाई हैं। इन्हीं में छत्तीसगढ़ की यह दुर्लभ अवलोकितेश्वर कांस्य प्रतिमा भी शामिल है। भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
यह प्रतिमा महासमुंद जिले के विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल सिरपुर से जुड़ी हुई है। वर्ष उन्नीस सौ उनतालीस में सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास यह प्रतिमा प्राप्त हुई थी। यह उस समय मिले कांस्य प्रतिमाओं के बड़े संग्रह का हिस्सा थी। बाद में इसे संरक्षण के लिए रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में रखा गया, लेकिन बाद में यह चोरी हो गई और विदेश पहुंच गई।
इतिहासकारों के अनुसार प्रतिमा पर अंकित शिलालेख में ‘द्रौणग्रिदत्त’ नाम का उल्लेख मिलता है, जो प्राचीन श्रीपुर अर्थात वर्तमान सिरपुर का निवासी था। इससे इस प्रतिमा का ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ जाता है। यह प्रतिमा छत्तीसगढ़ की समृद्ध बौद्ध परंपरा, प्राचीन कला और सांस्कृतिक वैभव की महत्वपूर्ण पहचान मानी जाती है।
सिरपुर प्राचीन काल में बौद्ध संस्कृति, स्थापत्य कला और आध्यात्मिक ज्ञान का बड़ा केंद्र रहा है। वहां से मिली यह प्रतिमा प्रदेश की गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण है। लंबे समय बाद इस धरोहर की वापसी को प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा है कि यह प्रतिमा केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश की अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है। उन्होंने केंद्र सरकार से सभी औपचारिक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कर प्रतिमा को राज्य शासन को सौंपने का आग्रह किया है, ताकि इसे फिर से महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित रखा जा सके और आम नागरिकों, शोधार्थियों तथा इतिहास प्रेमियों के लिए प्रदर्शित किया जा सके।
राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्रतिमा की सुरक्षा, संरक्षण और प्रदर्शन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। अवलोकितेश्वर प्रतिमा की वापसी को छत्तीसगढ़ की खोई हुई सांस्कृतिक विरासत की पुनर्स्थापना और सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रदीप मिश्रा
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