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बदलता छत्तीसगढ़: वनोपज की चमक से संवर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

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रायपुर छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

हरा सोना बन रहा आत्मनिर्भरता का आधार, वनोपज से गांवों में बढ़ रही समृद्धि और रोजगार

छत्तीसगढ़ ACGN:- हर्बल स्टेट के रूप में पहचान बना चुका छत्तीसगढ़ अब अपनी समृद्ध वन संपदा और दूरदर्शी सरकारी नीतियों के दम पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है। राज्य के जंगलों से मिलने वाला वनोपज अब केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। वनों से मिलने वाला यह “हरा सोना” आज हजारों ग्रामीण परिवारों की आय और आत्मनिर्भरता का आधार बन चुका है।


छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता, बांस, लाख, शहद और औषधीय पौधों को विशेष महत्व दिया जाता है। इसके साथ ही सागौन, साल, बीजा और शीशम जैसे बहुमूल्य वृक्ष भी राज्य की आर्थिक ताकत माने जाते हैं। आधुनिक तकनीक और प्रसंस्करण इकाइयों के जरिए इन वन उत्पादों को अब उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों में बदला जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को बेहतर आमदनी मिल रही है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा लोकार्पित जामगांव एम की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। यहां आंवला, बेल, गिलोय और अश्वगंधा जैसे उत्पादों से जूस, कैंडी और हर्बल पाउडर तैयार किए जा रहे हैं। आधुनिक गोदामों में लगभग 20 हजार मीट्रिक टन भंडारण क्षमता उपलब्ध है, जिससे किसानों और संग्राहकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से राहत मिल रही है।


राज्य सरकार का आधिकारिक ब्रांड छत्तीसगढ़ हर्बल्स अब देशभर में लोकप्रिय हो रहा है। पहले जहां संजीवनी स्टोरों की संख्या सीमित थी, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 1500 से अधिक हो चुकी है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पाद उपलब्ध हैं। भृंगराज तेल, नीम तेल, च्यवनप्राश, शुद्ध शहद, महुआ उत्पाद, बेल शर्बत और आयुर्वेदिक चूर्ण जैसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
इस पूरी व्यवस्था में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनकर सामने आई है। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाएं मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण और पैकेजिंग जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। इससे गांवों से पलायन में कमी आई है और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। यह मॉडल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास का सफल उदाहरण माना जा रहा है।
वर्ष 2025 में स्थापित हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट ने छत्तीसगढ़ को हर्बल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में नई पहचान दिलाई है। यहां औषधीय पौधों से उच्च गुणवत्ता वाले अर्क तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी मांग देश और विदेश की फार्मास्युटिकल तथा वेलनेस इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रही है। अब छत्तीसगढ़ केवल कच्चा माल उपलब्ध कराने वाला राज्य नहीं, बल्कि परिष्कृत हर्बल उत्पादों के निर्माण का मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है।
प्रदीप मिश्रा
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