मौत के दो साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा, जनदर्शन में छलका पीड़ित परिवार का दर्द
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कोरबा (छत्तीसगढ़)
By ACGN 7647981711, 9303948009
बरपाली के 6-4 प्रकरण में कार्रवाई ठप, बार-बार आवेदन के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
कोरबा ACGN:- जनपद पंचायत कोरबा के ग्राम बरपाली से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कुएं में गिरने से हुई एक महिला की मौत के दो साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को शासन की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता अब तक नहीं मिल पाई है। थक-हार कर परिवार ने कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर एक बार फिर न्याय की गुहार लगाई है।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम बरपाली निवासी महिला की 17 जनवरी 2023 को कुएं में गिरने से दुखद मौत हो गई थी। घटना के बाद शासन के नियमों के तहत पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस पंचनामा, 6-4 प्रकरण की कार्यवाही सहित सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर तहसील भैसमा और जिला प्रशासन कोरबा में जमा कर दिए गए थे। परिजनों का कहना है कि उन्होंने हर प्रक्रिया का पालन किया, फिर भी उन्हें आज तक मुआवजा राशि नहीं दी गई।
परिवार का आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर कई बार प्रशासन के दरवाजे खटखटाए। 7 जनवरी 2025, 24 मार्च 2025 और 20 मई 2025 को कलेक्टर जनदर्शन सहित संबंधित कार्यालयों में आवेदन प्रस्तुत किए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला और मामला फाइलों में ही दबकर रह गया। इस बीच परिवार आर्थिक तंगी और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है, क्योंकि जिस सहायता पर उनका अधिकार है, वही उन्हें समय पर नहीं मिल रही।

पीड़ित ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस पंचनामा, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की प्रतियां जमा करने के बावजूद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे यह सवाल उठता है कि जब कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो आखिर मुआवजा देने में देरी क्यों हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी दुर्घटनाओं के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा होती है, लेकिन इस तरह की लापरवाही से न केवल एक परिवार प्रभावित होता है, बल्कि शासन की योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं। यह मामला दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में अभी भी गंभीर खामियां मौजूद हैं।
अब पीड़ित परिवार को कलेक्टर से उम्मीद है कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देंगे और जल्द से जल्द मुआवजा राशि दिलाने की पहल करेंगे। साथ ही यह भी अपेक्षा है कि लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी अन्य जरूरतमंद को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रदीप मिश्रा
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