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बीपीएल, सिकलसेल और थैलेसिमिया मरीजों को मिलेगा निःशुल्क रक्त

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

सरकारी प्रावधान के तहत जिले में मजबूत हुई रक्त सेवा व्यवस्था, एक यूनिट से तीन मरीजों का होगा उपचार

कोरबा ACGN:- जिले में गरीब और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राहत देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने रक्त सेवा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी के नेतृत्व में यह व्यवस्था मजबूत की गई है ताकि जरूरतमंदों को समय पर सुरक्षित रक्त मिल सके।
जिले में वर्तमान में एक शासकीय ब्लड सेंटर मेडिकल कॉलेज संबद्ध चिकित्सालय में संचालित है, वहीं चार निजी ब्लड सेंटर भी कार्यरत हैं जिनमें बिलासा ब्लड सेंटर घंटाघर, संवेदना ब्लड सेंटर कोसाबाड़ी, बालाजी ब्लड सेंटर एनकेएच हॉस्पिटल परिसर और कटघोरा ब्लड सेंटर शामिल हैं। शासकीय सहित तीन केंद्रों में ब्लड कंपोनेंट यानी रक्त अवयव पृथक्करण की सुविधा उपलब्ध है।
पहले एक यूनिट संपूर्ण रक्त एक ही मरीज को चढ़ाया जाता था, लेकिन अब उसी एक यूनिट से रेड ब्लड सेल्स, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स अलग-अलग तैयार किए जाते हैं, जिससे तीन मरीजों का उपचार संभव हो रहा है। एनीमिया और अधिक रक्तस्राव में आरबीसी, डेंगू और कैंसर में प्लेटलेट्स तथा जलन, लिवर रोग और रक्त विकार में प्लाज्मा उपयोगी साबित हो रहा है।
शासकीय ब्लड सेंटर में संपूर्ण रक्त के लिए 1100 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क निर्धारित है, जबकि निजी केंद्रों में 1550 रुपये शुल्क लिया जाता है। यह राशि रक्त के लिए नहीं बल्कि उसकी जांच और प्रोसेसिंग के लिए ली जाती है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों और सिकलसेल एनीमिया तथा थैलेसिमिया से पीड़ित रोगियों को शासकीय नियमों के तहत निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे नियमित रक्त चढ़ाने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।
डॉ. केशरी ने बताया कि दुर्घटना, प्रसव, बड़ी सर्जरी, एनीमिया, कैंसर और डेंगू जैसी स्थितियों में रक्त जीवनरक्षक साबित होता है। हर यूनिट की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और सिफलिस जैसी बीमारियों की अनिवार्य जांच राष्ट्रीय मानकों के अनुसार की जाती है, जिससे सुरक्षित रक्त उपलब्ध हो सके। अब जिले के मरीजों को रक्त के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।
जिले में समय-समय पर सामाजिक संगठनों और संस्थाओं के सहयोग से रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं, जिससे आपात स्थिति में पर्याप्त रक्त उपलब्ध रहता है। ई-रक्तकोष की सुविधा से परिजन ऑनलाइन भी उपलब्ध रक्त की जानकारी ले सकते हैं।
कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आम लोगों से अपील की है कि वे स्वैच्छिक रक्तदान को सामाजिक दायित्व समझें। 18 से 65 वर्ष तक का स्वस्थ व्यक्ति साल में तीन से चार बार सुरक्षित रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि स्वास्थ्य जांच का अवसर मिलता है। सभी उपकरण पूरी तरह स्टरलाइज्ड होते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा नहीं रहता।

प्रदीप मिश्रा
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