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कोरबा : महिला से छेड़छाड़ के आरोप में SI गिरफ्तार, निलंबन के साथ विभागीय जांच शुरू

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कोरबा  ACGN:- कोरबा जिले के कटघोरा थाना में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर के विरुद्ध महिला द्वारा छेड़छाड़ का आरोप लगाए जाने के बाद मामला गंभीर और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। महिला से जुड़े अपराध को गंभीरता से लेते हुए कोरबा पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर आरोपी सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
आरोपी सब-इंस्पेक्टर एस.के. कोसरिया (उम्र 58 वर्ष), जो वर्तमान में कटघोरा थाना में पदस्थ हैं और सेवा निवृत्ति के करीब बताए जा रहे हैं, के विरुद्ध करीब 45 वर्षीय महिला ने 18 जनवरी को थाना कटघोरा में लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में महिला ने अश्लील व्यवहार एवं छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सब-इंस्पेक्टर के विरुद्ध संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया। इसके बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय में आरोपी की ओर से जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनवाई उपरांत निरस्त कर दिया गया। इसके पश्चात न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने के आदेश दिए, जिसके तहत उन्हें कटघोरा उपजेल दाखिल कराया गया है।
वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा सब-इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस विभाग में महिला संबंधी आरोपों को अत्यंत गंभीर श्रेणी में रखा जाता है और ऐसे मामलों में आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय जांच (विभागीय/अनुशासनात्मक कार्यवाही) भी एक अनिवार्य प्रक्रिया होती है।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण में विभागीय जांच की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। विभागीय जांच के तहत आरोपी अधिकारी के आचरण, घटनाक्रम की परिस्थितियों, शिकायतकर्ता के बयान, कॉल डिटेल्स, मोबाइल फोन, घटनास्थल की स्थिति और अन्य तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। यह प्रक्रिया इसलिए भी आवश्यक मानी जाती है ताकि किसी भी स्तर पर न तो दोषी को संरक्षण मिले और न ही किसी निर्दोष अधिकारी के अधिकारों का हनन हो।
इस मामले में एक तथ्य यह भी सामने आया है कि शिकायतकर्ता महिला के पति को इसी माह की शुरुआत में अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। यह गिरफ्तारी भी आरोपी सब-इंस्पेक्टर द्वारा की गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, महिला का पति आदतन अवैध शराब विक्रेता है और न्यायालय द्वारा उसका जमानत आवेदन एक से अधिक बार निरस्त किया जा चुका है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यह पहलू भी जांच का हिस्सा है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
दूसरी ओर, आरोपी सब-इंस्पेक्टर के अधिवक्ता ने आरोपों को पूर्ववर्ती कार्रवाई से उत्पन्न विवाद बताते हुए इन्हें साजिशन करार दिया है।

अधिवक्ता का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान शिकायतकर्ता महिला ने एसआई को पहचान लिया और उन्हें आवाज देकर रोका। इस दौरान महिला ने अपने पति के जेल में बंद होने का हवाला देते हुए उससे संबंधित बातचीत करने की बात कही। अधिवक्ता के अनुसार, एसआई ने महिला को बताया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और पुलिस स्तर पर इसमें कोई हस्तक्षेप संभव नहीं है। इसके बाद एसआई वहां से आगे बढ़ने लगे।
अधिवक्ता का यह भी कहना है कि उसी दौरान महिला ने कथित रूप से बातचीत के लिए अपने घर के अंदर चलने का आग्रह किया और चाय पीने का प्रस्ताव दिया, यह कहते हुए कि वहां शोरगुल कम है और बात स्पष्ट हो सकेगी। अधिवक्ता के अनुसार, एसआई जैसे ही घर के अंदर गए, उसके बाद घटनाक्रम को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जिसकी शिकायत बाद में थाना पहुंचकर दर्ज कराई गई। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम को जांच का विषय बताया है। हालांकि, यह पक्ष भी पूरी तरह जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चूंकि मामला महिला से जुड़ा है, इसलिए इसे अत्यंत संवेदनशीलता के साथ देखा जा रहा है। पुलिस और विभागीय जांच दोनों ही निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाई जा रही हैं। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना या किसी पक्ष को दोषी अथवा निर्दोष ठहराना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, आरोपी सब-इंस्पेक्टर न्यायिक अभिरक्षा में हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच और विभागीय कार्यवाही के पूर्ण होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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