पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ का भव्य लोकार्पण
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रायपुर – छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
राज्यपाल की पहल से स्थापित शोध पीठ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का बनेगी केंद्र
रायपुर | ACGN :- राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ का लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने शोध पीठ का विधिवत उद्घाटन कर इसे राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता को सशक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए जिससे दोनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों को अंतरविषयक अनुसंधान का अवसर मिलेगा।
सांस्कृतिक एकता को सशक्त करेगा शोध पीठ — राज्यपाल

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमंत शंकरदेव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, समानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं। यह शोध पीठ उत्तर-पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक और शोध स्तर पर जोड़ने की एक ऐतिहासिक पहल है।
उन्होंने कहा कि यह केंद्र भारत की संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों के अध्ययन का सशक्त मंच बनेगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया।
राज्यपाल ने श्रीमंत शंकरदेव को उत्तर-पूर्व भारत का महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठकर समरस समाज की स्थापना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से समानता, करुणा और उदारता के मूल्यों को समाज में स्थापित किया। उनके द्वारा रचित अंकिया नाट और बोरगीत भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की अमूल्य निधि हैं।
500 वर्ष पहले दिया ‘एक भारत’ का संदेश — मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव का कार्यक्षेत्र भले ही असम रहा हो, लेकिन उनके सामाजिक जागरण का प्रभाव संपूर्ण भारत पर पड़ा। उनके साहित्य, नाटक और भजन भारतीय संस्कृति की आत्मा को अभिव्यक्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने 500 वर्ष पूर्व ‘एक भारत’ का जो संदेश दिया, वही आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ संकल्प के रूप में साकार हो रहा है। नई पीढ़ी को अपने महान पूर्वजों के योगदान से परिचित कराकर हम सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं।
विविधताओं को एक सूत्र में पिरोया — डॉ. कृष्ण गोपाल
मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि असम जैसे विविधताओं से भरे प्रदेश में विभिन्न जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य श्रीमंत शंकरदेव ने भक्ति आंदोलन के माध्यम से किया। उन्होंने गांव-गांव में नामघर की स्थापना कर सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया।
भवन नहीं, विचारों की प्रयोगशाला बनेगा यह संस्थान — उच्च शिक्षा मंत्री
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि यह शोध पीठ केवल भवन नहीं बल्कि विचारों और शोध की जीवंत कार्यशाला बनेगी। यहां से निकलने वाला शोध भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाएगा।
कार्यक्रम के अंत में शोध पीठ की स्थापना से जुड़े सभी सहयोगियों को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की गई कि यह केंद्र भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सत्य की खोज का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करेगा।
प्रदीप मिश्रा
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