ट्रैक्टर हादसे के बाद प्रशासन पर उठे सवाल, अब तहसीलदार पर गिरी गाज!
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू सूरजपुर
कुबेरपुर में दुर्घटना के बाद कानून-व्यवस्था संभालने में प्रशासनिक शिथिलता का आरोप, सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा ने प्रभारी तहसीलदार करमचंद जाटवर को किया निलंबित।
सूरजपुर ACGN:- जिले के बिहारपुर क्षेत्र में प्रशासनिक जिम्मेदारी और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ग्राम कुबेरपुर में ट्रैक्टर दुर्घटना के बाद उत्पन्न कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने में कथित लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरतने के मामले में बिहारपुर के नायब तहसीलदार एवं प्रभारी तहसीलदार करमचंद जाटवर को निलंबित कर दिया गया है। सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा ने 2 नवंबर 2026 को निलंबन आदेश जारी किया।

जारी आदेश के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को ग्राम कुबेरपुर में ट्रैक्टर दुर्घटना के बाद कानून एवं शांति व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाने और जिम्मेदारियों के निर्वहन में शिथिलता बरतने की शिकायत की गई थी। बताया गया है कि 27 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर सूरजपुर के माध्यम से इस संबंध में शिकायत एवं प्रतिवेदन संभागायुक्त कार्यालय को प्राप्त हुआ था।

प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर संभागायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए करमचंद जाटवर की कार्यशैली एवं आचरण को शासकीय सेवक के दायित्वों के विपरीत माना। आदेश में उल्लेख किया गया है कि दुर्घटना के बाद उत्पन्न कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने में प्रशासनिक शिथिलता एवं कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरती गई, जिसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत तथा गंभीर कदाचार की श्रेणी में माना गया है।

इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत करमचंद जाटवर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय पटवारी प्रशिक्षण शाला, अंबिकापुर, जिला सरगुजा निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
यह कार्रवाई मैदानी स्तर पर पदस्थ अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, निलंबन को अंतिम विभागीय निष्कर्ष या सेवा से बर्खास्तगी नहीं माना जा सकता। आगे की विभागीय प्रक्रिया में संबंधित तथ्यों और अधिकारी के पक्ष का परीक्षण किया जाएगा। अब देखना होगा कि विभागीय जांच में इस पूरे मामले से जुड़े और कौन से तथ्य सामने आते हैं।
प्रदीप मिश्रा
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