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सूरजपुर की शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल! पुरानी भर्ती से कथित फर्जी मार्कशीट तक, नवोदय-प्रयास प्रवेश प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

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सूरजपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

प्रेमनगर की पांच नियुक्तियों के दस्तावेजों की जांच की मांग, रामानुजनगर की पुलिस शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति और प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अभिभावकों में सवाल

सूरजपुर जिला ACGN:- शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव होती है। सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की वैधता और प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। लेकिन सूरजपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ पुराने और नए मामले अब सवालों के घेरे में हैं। प्रेमनगर विकासखंड की वर्ष 2007-08 की शिक्षाकर्मी वर्ग-3 भर्ती में पांच नियुक्तियों के दस्तावेजों की जांच की मांग, रामानुजनगर में कथित फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी का मामला और नवोदय विद्यालय तथा प्रयास आवासीय विद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर उठ रही शंकाओं ने विभागीय जवाबदेही की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
      प्रेमनगर भर्ती: पांच नियुक्तियों के दस्तावेजों पर सवाल
प्रेमनगर विकासखंड में वर्ष 2007-08 की शिक्षाकर्मी वर्ग-3 भर्ती को लेकर पांच नियुक्तियों के दस्तावेजों और चयन प्रक्रिया की जांच की मांग उठाई गई है। शिकायत में अंकसूची, अनुभव प्रमाणपत्र, डीएड योग्यता और वर्ष 2016 में हुए नियमितीकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि एक अभ्यर्थी के मूल प्राप्तांक 58.20 प्रतिशत होने के बावजूद चयन सूची में 76.62 प्रतिशत अंक दर्ज किए गए। यदि यह दावा सही है, तो इसकी जांच के लिए मूल अंकसूची, चयन सूची, प्रमाणपत्र जारी करने वाले संस्थानों के रिकॉर्ड और नियुक्ति आदेशों का मिलान आवश्यक होगा।
मामले में यह भी जरूरी है कि संबंधित विभाग सभी पांच नियुक्तियों के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे। हालांकि, केवल शिकायत या आरोप के आधार पर किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों के सत्यापन और जांच के बाद ही सामने आना चाहिए।


रामानुजनगर में कथित फर्जी मार्कशीट: शिकायत के बाद क्या हुई कार्रवाई?
रामानुजनगर विकासखंड में कुछ महीने पहले एक शिक्षक की नौकरी में कथित फर्जी मार्कशीट के इस्तेमाल को लेकर मामला सामने आने की बात कही गई थी। इस संबंध में रामानुजनगर थाने में शिकायत दिए जाने की जानकारी है, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार अब तक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
इस मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल सामने हैं। क्या संबंधित शैक्षणिक बोर्ड से मार्कशीट का सत्यापन कराया गया? क्या पुलिस ने जांच शुरू की? क्या शिक्षा विभाग ने नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की? यदि जांच पूरी हो चुकी है, तो उसका निष्कर्ष क्या रहा?
पुलिस और शिक्षा विभाग को इस मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि शिकायत पर हुई कार्रवाई की वास्तविक जानकारी आम लोगों तक पहुंच सके। यदि प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
नवोदय और प्रयास में प्रवेश: ट्यूशन और चयन को लेकर उठ रही शंकाएं
जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय और प्रयास आवासीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी कुछ अभिभावकों के बीच सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ शिक्षक निजी ट्यूशन देते हैं और उनके यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इन संस्थानों में प्रवेश मिलता है, जबकि अच्छे अंक प्राप्त करने वाले कुछ अन्य विद्यार्थियों का चयन नहीं हो पाता।
हालांकि, किसी विद्यार्थी का निजी ट्यूशन पढ़कर चयन हो जाना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसी तरह अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद किसी विद्यार्थी का चयन नहीं होना भी अपने आप में गड़बड़ी साबित नहीं करता।
लेकिन यदि किसी शिक्षक पर प्रवेश के नाम पर पैसे लेने, प्रवेश की गारंटी देने या अपने पद का अनुचित इस्तेमाल करने की विशिष्ट शिकायत है, तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। चयन सूची, पात्रता, उपलब्ध सीटों, लागू नियमों और प्राप्त शिकायतों के रिकॉर्ड के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अभिभावकों की आशंकाओं को दूर करने के लिए संबंधित विभाग को प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और शिकायतों पर की गई कार्रवाई का विवरण भी सामने रखना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र विद्यार्थी के साथ अन्याय की आशंका न रहे।
शिक्षा विभाग और प्रशासन से जवाबदेही की मांग
इन सभी मामलों को लेकर संबंधित अधिकारियों से मांग की जा रही है कि प्रेमनगर की पुरानी भर्ती के मूल दस्तावेजों और नियमितीकरण प्रक्रिया की जांच कराई जाए। रामानुजनगर की पुलिस शिकायत की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए तथा नवोदय और प्रयास विद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जाए।
यदि किसी मामले में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो संबंधित पक्षों की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला, जवाब का इंतजार
सूरजपुर जिले में शिक्षा से जुड़े इन मामलों का निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षण जरूरी है। यह मुद्दा किसी व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि नियुक्तियों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करने और प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने का है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और पुलिस इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं और जांच को लेकर आगे क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल संबंधित विभागों के आधिकारिक पक्ष और कार्रवाई की स्थिति का इंतजार है।


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प्रदीप मिश्रा [संपादक]
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