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12 नाम, ₹1.20 लाख की सहायता और कई सवाल! चरचा कॉलरी में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान की सूची चर्चा में

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कोरिया, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू सूरजपुर

प्रस्तुत दस्तावेज में 12 लाभार्थियों के नाम के सामने ₹10-10 हजार दर्ज, पात्रता और चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग; संबंधित पक्षों का जवाब आना बाकी।

कोरिया ACGN:- कोरिया जिले के चरचा कॉलरी क्षेत्र में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान राशि के वितरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। 26 अक्टूबर 2026 को सामने आए एक दस्तावेज में क्रमांक 47 से 58 तक कुल 12 लाभार्थियों के नाम दर्ज बताए गए हैं। प्रत्येक नाम के सामने 10 हजार रुपये की सहायता राशि अंकित है। इस हिसाब से सूची में कुल 1 लाख 20 हजार रुपये का उल्लेख है। अब इस मामले में लाभार्थियों की पात्रता, चयन प्रक्रिया और सरकारी सहायता के वितरण में पारदर्शिता को लेकर जांच की मांग उठ रही है।


      सूची में 12 नाम, प्रत्येक के सामने 10 हजार रुपये
प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार, सूची में निम्नलिखित नाम और क्रमांक दर्ज हैं—
सत्य नारायण — क्रमांक 380556
सोनिया — क्रमांक 380557
अनिल पासवान — क्रमांक 380558
मनोज कुमार ठाकुर — क्रमांक 380559
मनोज कुमार विश्वकर्मा — क्रमांक 380560
आदित्य कुमार जायसवाल — क्रमांक 380561
संदीप कश्यप — क्रमांक 380562
मनोज कुमार — क्रमांक 380563
दीपा सिंह — क्रमांक 380564
देव कुमारी — क्रमांक 380565
अशरफ अली — क्रमांक 380566
दुर्गेश ठाकुर — क्रमांक 380567
दस्तावेज में सभी 12 नामों के सामने 10-10 हजार रुपये की राशि दर्ज है। हालांकि, केवल इस सूची के आधार पर यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि सभी लाभार्थियों को वास्तव में राशि का भुगतान हुआ है या नहीं। उनकी आर्थिक स्थिति, आवेदनों की जांच और सहायता स्वीकृत करने के आधार की जानकारी भी संबंधित विभागीय अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकेगी।
जनप्रतिनिधि से कथित संबंधों को लेकर भी जांच की मांग
इस मामले में नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश सिंह से संबंधित परिवार के लोगों अथवा करीबी व्यक्तियों को लाभ दिए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज में लाभार्थियों के साथ किसी जनप्रतिनिधि के पारिवारिक या अन्य संबंधों का विवरण दर्ज नहीं है। इसी तरह, सूची से यह भी साबित नहीं होता कि लाभार्थियों के चयन में किसी प्रकार का हस्तक्षेप हुआ है।
ऐसे में आरोपों की वास्तविकता जानने के लिए संबंधित लाभार्थियों के आवेदन, आय संबंधी दस्तावेज, अनुशंसा पत्र, स्वीकृति आदेश और भुगतान अभिलेखों की जांच आवश्यक होगी। किसी जनप्रतिनिधि से संबंध होना अपने आप में अपात्रता का प्रमाण नहीं है। पात्रता का निर्धारण योजना के लागू नियमों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
जरूरतमंदों के लिए बनी योजना, पात्रता का सत्यापन कितना जरूरी?
मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान जैसी सहायता का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सहायता निर्धारित नियमों के अनुसार स्वीकृत हो और पात्र आवेदकों तक पहुंचे। यदि किसी व्यक्ति को नियमों के विपरीत लाभ दिए जाने की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित विभाग को उसका परीक्षण करना चाहिए।
चरचा कॉलरी के इस मामले में प्रमुख सवाल यही हैं कि लाभार्थियों का चयन किन आधारों पर किया गया, उनकी आर्थिक स्थिति का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और सहायता राशि जारी करने से पहले किन दस्तावेजों की जांच की गई। इन सवालों का जवाब संबंधित विभागीय अभिलेखों और आधिकारिक जानकारी से ही मिल सकता है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जानकारी की अपेक्षा
मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से प्रस्तुत सूची की प्रामाणिकता की पुष्टि करने, सभी लाभार्थियों की पात्रता की जांच करने तथा स्वीकृति और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड का परीक्षण करने की मांग की जा रही है। यदि किसी लाभार्थी के जनप्रतिनिधि से पारिवारिक या अन्य संबंध होने की जानकारी सामने आती है, तो चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता की भी तथ्यों के आधार पर जांच की जानी चाहिए।
यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सूची में दर्ज राशि वास्तव में वितरित हुई या नहीं और लाभार्थियों के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं।

इस समाचार का उद्देश्य सरकारी सहायता वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवालों को सामने लाना है। संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश सिंह का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने मामले के सभी पक्ष रखे जा सकें।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस सूची की जांच कर लाभार्थियों की पात्रता, स्वीकृति प्रक्रिया और भुगतान की स्थिति पर क्या जानकारी देता है।


प्रदीप मिश्रा
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