दवाओं की कीमत से लेकर नकली दवाओं के खतरे तक – राज्यपाल ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था के अहम सवाल, ग्रामीणों तक इलाज पहुंचाने पर दिया जोर
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय
एपीटीआई के 28वें राष्ट्रीय अधिवेशन एपिकॉन-2026 में राज्यपाल रमेन डेका ने कहा—दवाएं आम आदमी की पहुंच में हों, ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें तथा नकली दवाओं पर प्रभावी रोक लगे। छत्तीसगढ़ की वनौषधियों और बैगा समुदाय के पारंपरिक औषधीय ज्ञान पर वैज्ञानिक शोध करने की भी वकालत की।
रायपुर ACGN:- इलाज का खर्च, दवाओं की कीमत और नकली दवाओं का खतरा—ये ऐसे सवाल हैं, जिनका सीधा संबंध आम आदमी की जिंदगी से है। इन्हीं चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के लिए चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा। स्वास्थ्य और शिक्षा को केवल कारोबार तक सीमित न रखकर समाजसेवा का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

राज्यपाल शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया (एपीटीआई) के 28वें राष्ट्रीय अधिवेशन ‘एपिकॉन-2026’ को संबोधित कर रहे थे। अधिवेशन का विषय ‘फार्मा शिक्षक आत्मनिर्भर भारत के लिए फार्मासिस्ट तैयार करने का संकल्प’ था।

दवाएं महंगी होंगी तो इलाज की पहुंच भी होगी सीमित
राज्यपाल ने कहा कि देश ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन ग्रामीण आबादी तक बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना अब भी बड़ी चुनौती है। दवाओं की कीमत आम आदमी की पहुंच में होनी चाहिए। चिकित्सकों को दवाएं लिखते समय मरीज की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए और जहां संभव हो, कम कीमत वाली प्रभावी दवाओं के विकल्प अपनाने चाहिए।
उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को गांवों तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है।

नकली दवाओं पर रोक क्यों जरूरी?
नकली दवाओं को गंभीर खतरा बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि इनसे मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन पर संकट पैदा हो सकता है। साथ ही, चिकित्सा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी कमजोर होता है। उन्होंने फार्मेसी के विद्यार्थियों, शिक्षकों और दवा उद्योग से दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
उनके संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि दवाओं की उपलब्धता के साथ उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि मरीजों को प्रभावी और भरोसेमंद उपचार मिल सके।
बैगा समुदाय के पारंपरिक ज्ञान पर हो वैज्ञानिक शोध
छत्तीसगढ़ के वनांचलों में मौजूद औषधीय संसाधनों और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विशेषकर बैगा समुदाय के पास औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण ज्ञान है। इसका वैज्ञानिक अध्ययन और दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए।
उन्होंने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उपलब्ध जानकारियों की आधुनिक शोध के माध्यम से जांच करने और उनकी उपयोगिता का आकलन करने पर जोर दिया। इससे छत्तीसगढ़ की वनौषधियों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक आधार पर समझने और संभावित उपयोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

फार्मेसी शिक्षा में एआई और मेडिकल डिवाइस पर जोर
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटू एम. पटेल ने बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप फार्मेसी पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मेडिकल डिवाइस जैसे विषय शामिल किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने अनावश्यक एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए देश के 42 स्थानों पर चलाए जा रहे अभियान का भी उल्लेख किया।
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने विश्वविद्यालय में संचालित शोध कार्यों की जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ के वन आधारित औषधीय संसाधनों से नए उत्पाद विकसित करने और फार्मेसी शोध को अन्य विज्ञान विषयों से जोड़ने की जरूरत बताई।
एपीटीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मिलिंद जनराव उमेकऱ ने संगठन की गतिविधियों तथा फार्मेसी शिक्षकों के प्रशिक्षण, शोध और उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
भारतीय शिक्षा मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी.आर. शंकरानंद ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक बदलाव और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण का माध्यम बनाने पर जोर दिया।

1,800 से अधिक प्रतिभागियों की मौजूदगी
राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से लगभग 700 शिक्षक, 900 विद्यार्थी और फार्मेसी, विपणन तथा उद्योग जगत से जुड़े करीब 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजन में सस्ती दवाओं, सुरक्षित उपचार, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शोध के माध्यम से स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।
अधिवेशन में उठे मुद्दों ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, दवाओं की गुणवत्ता और पारंपरिक औषधीय ज्ञान के वैज्ञानिक उपयोग जैसे विषयों को प्रमुखता से सामने रखा।
प्रदीप मिश्रा
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