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सुशासन की असली कसौटी: अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, जनता का बढ़े विश्वास

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

रायपुर, ACGN:- लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है। यह विश्वास केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उस समय मजबूत होता है, जब आम नागरिक की समस्या सुनी जाती है, जरूरतमंद को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है और लोगों को अपने अधिकारों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संवेदनशील प्रशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के माध्यम से सुशासन को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि इनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।
प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के अनुरूप राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ तथा जवाबदेह बनाने पर जोर दे रही है। शासन और जनता के बीच संवाद बढ़ाना तथा नागरिकों की समस्याओं के निराकरण को प्राथमिकता देना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
  जनसमस्याओं का समाधान, सुशासन की पहली पहचान
सुशासन का अर्थ केवल सरकारी योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आम नागरिक की आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचे और उसकी समस्या का समय पर समाधान हो। जिला एवं विकासखंड स्तर पर आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से लोगों को विभिन्न विभागों की सेवाओं, योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी देने के साथ पात्र हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने तथा प्राप्त आवेदनों के निराकरण की पहल की जा रही है।
ऐसी व्यवस्थाओं की उपयोगिता तभी पूरी तरह सामने आती है, जब शिविरों में मिले आवेदनों पर प्रभावी कार्रवाई हो, लोगों को उनके आवेदनों की स्थिति की जानकारी मिले और समस्याओं के समाधान में अनावश्यक देरी न हो। जनता को सम्मानपूर्वक सुनना और उसकी परेशानी को गंभीरता से लेना ही संवेदनशील प्रशासन की वास्तविक पहचान है।
      डिजिटल सुशासन से आसान होंगी शासकीय सेवाएं
आज के डिजिटल युग में तकनीक प्रशासनिक व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। राज्य में सेवा सेतु पोर्टल और डिजिटल सेवा केंद्रों के जरिए विभिन्न शासकीय सेवाओं तक नागरिकों की पहुंच आसान बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए ऐसी सुविधाएं उपयोगी हो सकती हैं।
हालांकि डिजिटल व्यवस्था की सफलता केवल ऑनलाइन आवेदन की सुविधा तक सीमित नहीं है। जरूरी यह भी है कि नागरिकों को आवेदन की स्थिति पता चले, प्रक्रियाएं स्पष्ट हों और सेवाएं निर्धारित समय में उपलब्ध कराई जाएं। जिन लोगों को तकनीकी जानकारी नहीं है, उन्हें भी सहायता मिलनी चाहिए, ताकि डिजिटल व्यवस्था किसी के लिए नई परेशानी न बने।
       योजनाओं का लाभ पहुंचे जरूरतमंद परिवारों तक
किसी भी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का महत्व तब सामने आता है, जब उनसे जरूरतमंद परिवारों के जीवन में वास्तविक बदलाव दिखाई देता है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों और जनजातीय समुदायों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर जोर दे रही है।
महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का उद्देश्य उन्हें घरेलू जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और बचत जैसे कार्यों में सहयोग देना है। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। किसानों, श्रमिकों और ग्रामीण परिवारों के लिए संचालित विभिन्न योजनाएं भी आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल हैं।
लेकिन योजनाओं की वास्तविक सफलता का आकलन केवल लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि पात्र व्यक्ति छूट तो नहीं रहे, सहायता समय पर मिल रही है या नहीं और योजनाओं का लाभ उनके जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
             शिकायत निवारण से बढ़ती जवाबदेही
जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए शिकायतों को सुनना और उनका समाधान करना बेहद जरूरी है। सरकारी व्यवस्था में शिकायत दर्ज कराने की सुविधा तभी सार्थक होती है, जब संबंधित विभाग उस पर कार्रवाई करे और शिकायतकर्ता को उचित जानकारी भी मिले।
राज्य में सीएम हेल्पलाइन 1076 तथा नगरीय क्षेत्रों में निदान-1100 जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से शिकायतें दर्ज कराने और नागरिक समस्याओं के निराकरण की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में ऐसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
जनता की शिकायत को केवल एक आवेदन या कागज का टुकड़ा समझना उचित नहीं है। उसके पीछे किसी परिवार की परेशानी, किसी बुजुर्ग की जरूरत या किसी मोहल्ले की सामूहिक समस्या हो सकती है। इसलिए शिकायतों के निराकरण में संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
      गांव से शहर तक, विकास का लाभ सभी को मिले
छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में निवास करती है। ऐसे में राज्य के समग्र विकास के लिए दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
बस्तर और सरगुजा जैसे अंचलों में विकास का अर्थ केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए। वहां के लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार और आजीविका के अवसर भी उपलब्ध होने चाहिए। स्थानीय जरूरतों को समझकर योजनाएं बनाना और उनके क्रियान्वयन में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
सुशासन की असली पहचान तब बनेगी, जब दूरस्थ गांव में रहने वाले नागरिक को भी सम्मान, सुविधा और अवसर प्राप्त हों तथा उसे अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े।
             जनभागीदारी से मजबूत होता सुशासन
प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सेवा संकल्प अभियान ने जनसेवा और जनभागीदारी से जुड़ी पहलों को सामने लाने का अवसर दिया। अभियान के अंतर्गत सेवा सेतु, सेवा की कहानी, सेवा मेरा योगदान और सुशासन सेवा संवाद जैसी पहलें शासन की सेवाओं, जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जुड़ी रहीं।
यह समझना जरूरी है कि सुशासन केवल सरकार और अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है। जागरूक नागरिक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोग अपनी समस्याओं को उचित माध्यम से सामने रखें, योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें, पात्रता के अनुसार लाभ लें और सार्वजनिक संपत्ति तथा सामुदायिक संसाधनों की रक्षा में सहयोग करें, तो विकास की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकती है।
साथ ही, जनभागीदारी का अर्थ केवल सरकारी अभियानों में शामिल होना नहीं, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर रखना, कमियों की जानकारी देना और जनहित के कार्यों में सक्रिय सहयोग करना भी है।
     घोषणाओं से आगे, जमीन पर दिखना चाहिए बदलाव
सुशासन की चर्चा तब सार्थक होगी, जब आम नागरिक अपने दैनिक जीवन में उसका प्रभाव महसूस करे। किसान को समय पर सहायता मिले, महिला को आर्थिक संबल प्राप्त हो, युवा को अवसर मिले, गरीब परिवार को आवास और बुनियादी सुविधाएं मिलें तथा शिकायत करने वाले नागरिक को उचित जवाब मिले, यही सुशासन की व्यावहारिक तस्वीर है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा को प्राथमिकता देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का मूल्यांकन भी इन्हीं कसौटियों पर किया जाना चाहिए। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध शिकायत निवारण, सेवाओं की गुणवत्ता और नागरिकों की संतुष्टि किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण परीक्षा हैं।
विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प तभी साकार होगा, जब विकास का लाभ हर वर्ग, हर क्षेत्र और हर जरूरतमंद तक पहुंचे। सरकार, प्रशासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत रिश्ता ही इस लक्ष्य की आधारशिला है। सुशासन का वास्तविक अर्थ है ऐसी व्यवस्था, जिसमें नागरिक की समस्या को महत्व मिले, अधिकारों का सम्मान हो और विकास के अवसर सबके लिए सुलभ हों।
जनता का विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी है। इस विश्वास को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि संवेदनशीलता के साथ पारदर्शिता, घोषणाओं के साथ प्रभावी क्रियान्वयन और योजनाओं के साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित हो। यही वह रास्ता है, जो छत्तीसगढ़ को समावेशी और जनकल्याणकारी विकास की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।


प्रदीप मिश्रा
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