कानून का शिकंजा कसते ही बीमारी, अस्पताल में आराम! आरोपी को मिला कैसा इंतजाम? रसूख का असर या सिस्टम की मेहरबानी?
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण के आरोप में गिरफ्तार अडानी ग्रुप के अधिकारी पवन महतो को जिला अस्पताल में भर्ती कराने पर उठे सवाल, ड्यूटी पर तैनात जवान की भूमिका की जांच।
कोरबा ACGN:- कानून के शिकंजे में आने के बाद आरोपी अस्पताल पहुंच जाए और वहां उसकी निगरानी में तैनात पुलिसकर्मी भी अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह नजर आएं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। कोरबा के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में दैहिक शोषण के आरोपी पवन महतो को भर्ती किए जाने के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने पुलिस निगरानी और अस्पताल में बंदियों की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला मीडिया के सामने आने के कुछ समय बाद आरोपी को अस्पताल से छुट्टी मिली और पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार दोपहर कुछ मीडियाकर्मी जिला अस्पताल के मेल सर्जिकल वार्ड पहुंचे। वहां एक कमरे में आरोपी पवन महतो बिस्तर पर आराम से बैठकर बातचीत करता दिखाई दिया। उसके पास एक पुलिस जवान बैठा था, जबकि दूसरा जवान दूसरे बिस्तर पर आराम करता नजर आया। बताया गया कि आरोपी के हाथ में कैनुला लगा था और ड्रिप स्टैंड पर लटकी हुई थी। आरोपी ने अपनी तबीयत खराब होने और हृदय संबंधी परेशानी की बात कही थी। हालांकि, उसकी वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति की पुष्टि मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों की रिपोर्ट से ही हो सकती है।
बताया जा रहा है कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने पवन महतो के खिलाफ शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण करने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कथित घटनाक्रम की अवधि 19 अप्रैल 2023 से 17 सितंबर 2024 तक बताई गई है। आरोप है कि शुरुआत में छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद पीड़िता ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला आईजी तक पहुंचने के बाद अपराध की धाराओं में बदलाव किया गया। ये आरोप हैं, जिनका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
पुलिस आरोपी को वैधानिक कार्रवाई से पहले चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची थी। वहां तबीयत खराब होने पर उसे भर्ती कराया गया। लेकिन अस्पताल में आरोपी की निगरानी के दौरान पुलिस जवानों की स्थिति सामने आने के बाद व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। यदि किसी आरोपी को चिकित्सकीय कारणों से अस्पताल में भर्ती करना जरूरी हो, तो उसका उपचार भी होना चाहिए और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी पूरी गंभीरता से निभाई जानी चाहिए। दोनों में से किसी एक पक्ष की अनदेखी नहीं हो सकती।
मामला सामने आया तो अस्पताल से जेल तक पहुंचा आरोपी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटनाक्रम सामने आने के कुछ समय बाद आरोपी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद पुलिस उसे थाने लेकर पहुंची, आवश्यक कार्रवाई पूरी की और न्यायालय में पेश करने के बाद जेल दाखिल करा दिया।
इस संबंध में सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि आरोपी को शारीरिक परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा गया था। तबीयत ठीक नहीं होने के कारण उसे भर्ती कराया गया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच की जा रही है और पुलिस जवान दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह घटनाक्रम पुलिस विभाग के सामने एक अहम सवाल रखता है कि अस्पताल में भर्ती किसी आरोपी की निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। क्या ड्यूटी पर तैनात जवान निर्धारित जिम्मेदारी निभा रहे थे? क्या अस्पताल में आरोपी को कोई विशेष सुविधा दी गई थी या भर्ती चिकित्सकीय आवश्यकता के कारण हुई थी? इन सवालों का जवाब जांच और संबंधित रिकॉर्ड से सामने आना चाहिए।
कानून की नजर में हर आरोपी के साथ नियमानुसार व्यवहार होना चाहिए। बीमारी की स्थिति में उपचार मिलना उसका अधिकार है, लेकिन सुरक्षा ड्यूटी में लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। अब निगाह पुलिस जांच पर है कि अस्पताल में तैनात जवानों की भूमिका और पूरी व्यवस्था को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
प्रदीप मिश्रा
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