सत्र अधूरा, नौकरी पर संकट! मानदेय शिक्षकों को अप्रैल तक राहत देने की मांग
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
जनदर्शन में कलेक्टर से लगाई गुहार, बोले शिक्षक – बच्चों की पढ़ाई भी न रुके और परिवार की रोजी-रोटी भी न छिने
कोरबा ACGN:- स्कूलों में पिछले दो-तीन वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे मानदेय शिक्षकों के सामने अब रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। व्याख्याता पदोन्नति और स्थानांतरण के कारण नियमित शिक्षकों की पदस्थापना होने से उनकी सेवाएं समाप्त होने की स्थिति बन रही है। इसी समस्या को लेकर मानदेय शिक्षक कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जनदर्शन में आवेदन देकर अप्रैल 2027 तक कार्यकाल बढ़ाने की मांग की।

शिक्षकों का कहना है कि वे सीमित मानदेय में पूरी जिम्मेदारी के साथ बच्चों को पढ़ाते आ रहे हैं। ऐसे में शिक्षा सत्र और परीक्षाएं पूरी होने से पहले उन्हें काम से हटाना उनके परिवार की आजीविका पर असर डालेगा। उन्होंने बताया कि पिछले सत्र में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के निर्देशानुसार संबंधित विद्यालयों में कार्यरत मानदेय शिक्षकों से अप्रैल 2026 तक अध्यापन कराने की बात कही गई थी। शिक्षकों ने पूर्व कलेक्टर अजीत बसंत के कार्यकाल में भी समय दिए जाने का विषय उठाते हुए इस सत्र में भी राहत देने की मांग की है।


मानदेय शिक्षकों ने नई भर्ती प्रक्रिया में सात वर्ष के अनुभव की कथित शर्त पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि जब वे दो-तीन वर्षों से लगातार विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं, तो उनके अनुभव को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित भर्ती नियमों की समीक्षा कर पात्रता के अनुरूप उचित अवसर देने की मांग की है।
क्या निकल सकता है समाधान? नियमित शिक्षकों की नियुक्ति का विरोध किए बिना शिक्षा विभाग नियमों के तहत विकल्प तलाश सकता है। जिन विद्यालयों में नियमित शिक्षक आ चुके हैं, वहां जरूरत के अनुसार मानदेय शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में समायोजित करने या सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से परीक्षा समाप्त होने तक सेवा जारी रखने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। साथ ही भर्ती में अनुभव संबंधी शर्तों की समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाए कि पूर्व अनुभव को किस तरह मान्यता दी जा सकती है।
अब जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह शिक्षकों की मांग पर समयबद्ध निर्णय ले, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो और वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक बेरोजगारी का सामना न करना पड़े। नियमित नियुक्तियां भी जरूरी हैं और शिक्षा सत्र की निरंतरता भी, ऐसा समाधान निकले, जिसमें बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे और शिक्षकों की आजीविका पर भी अनावश्यक संकट न आए।

प्रदीप मिश्रा
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