अब जमीन के इस्तेमाल के नियम होंगे आसान, छत्तीसगढ़ में बड़ा बदलाव
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने भूमि उपयोग व्यवस्था में ढील, आवासीय क्षेत्रों में अस्पताल-स्कूल और कार्यालयों की अनुमति; औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक आवास का रास्ता साफ
भूमि विकास नियमों में संशोधन के बाद कई गतिविधियों के लिए प्रक्रियाएं होंगी सरल, शहरी नियोजन सुधारों के लिए दो वर्षों में छत्तीसगढ़ को मिली 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता
रायपुर ACGN:- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने निवेश को बढ़ावा देने और शहरी विकास को गति देने की दिशा में भूमि उपयोग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। भारत सरकार द्वारा नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अनुपालन का बोझ कम करने के लिए सुझाए गए सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन किया गया है। नई व्यवस्था से भूमि उपयोग के नियम पहले की तुलना में अधिक सरल, स्पष्ट और लचीले होने की उम्मीद है।
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए इस सुधार का उद्देश्य बदलती आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप शहरी नियोजन को अधिक व्यावहारिक बनाना है। इसके लिए विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में निषेधात्मक सूची आधारित व्यवस्था अपनाई गई है। यानी संबंधित क्षेत्र में किन गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी, उन्हें स्पष्ट किया जाएगा और अन्य अनुमत्य गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।
दो वर्षों में मिली 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता
शहरी नियोजन सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार की विशेष सहायता योजना के तहत छत्तीसगढ़ को दो वित्तीय वर्षों में कुल 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 85 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई।
अब भूमि उपयोग नियमों में किया गया संशोधन इसी सुधार प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य अनावश्यक प्रतिबंधों और प्रक्रियात्मक जटिलताओं को कम कर निवेश तथा आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है।
आवासीय क्षेत्र में अस्पताल, स्कूल और कार्यालय
नई व्यवस्था में मिश्रित भूमि उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। संशोधित प्रावधानों के तहत अस्पताल और स्कूल जैसी जन-आवश्यक सुविधाओं को आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमत्य किया गया है। इसी तरह कार्यालयों को भी आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अनुमति दी गई है।
इससे लोगों को अपने निवास के आसपास शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। साथ ही घर और कार्यस्थल के बीच की दूरी कम होने से आने-जाने के समय तथा यातायात के दबाव को कम करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए आवास की सुविधा
औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों की जरूरतों को भी नए प्रावधानों में महत्व दिया गया है। संशोधित नियमों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी और संबंधित श्रमिकों के आवास जैसी सुविधाओं को अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है।
इससे उद्योगों के आसपास कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए रहने की सुविधाएं विकसित करने का रास्ता आसान होगा। कार्यस्थल के नजदीक आवास मिलने से दैनिक आवागमन में सुविधा होगी और औद्योगिक क्षेत्रों में सामाजिक अधोसंरचना को भी बढ़ावा मिल सकता है।
मनोरंजन भूमि उपयोग श्रेणी में श्मशान और कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमत्य किया गया है। इस तरह नई व्यवस्था में आर्थिक गतिविधियों के साथ नागरिक और सामाजिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है।
निवेश और रोजगार के लिए खुलेंगे नए अवसर
छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ जमीन के उपयोग की जरूरतें भी बदल रही हैं। ऐसे में आवासीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की उपलब्धता, व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार तथा औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुविधाओं का विकास जरूरी माना जा रहा है।
भूमि उपयोग नियमों में स्पष्टता और प्रक्रियाओं के सरलीकरण से निवेशकों और उद्यमियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने, नए निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
राज्य सरकार के अनुसार यह सुधार सुशासन, पारदर्शिता, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नए नियमों के माध्यम से शहरी नियोजन को अधिक आधुनिक और विकासोन्मुख बनाने का प्रयास किया गया है।
छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग व्यवस्था में यह बदलाव आने वाले समय में शहरों के विस्तार, निवेश, रोजगार और नागरिक सुविधाओं पर कितना असर डालता है, यह इसके जमीनी क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा।
प्रदीप मिश्रा
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