‘कहानीकार’ कार्यशाला में कहानी, कला और किताबों से जुड़े शिक्षक
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
दो दिवसीय कार्यशाला में कहानी लेखन, पुस्तक मेले और स्थानीय अनुभवों के जरिए बच्चों में जिज्ञासा व पर्यावरणीय संवेदनशीलता बढ़ाने पर जोर।
रायपुर ACGN:- बच्चों को अपने आसपास के पर्यावरण को समझने, सवाल पूछने और अनुभवों को रचनात्मक ढंग से व्यक्त करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला का 7 अक्टूबर को समापन हुआ। दूसरे दिन प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों ने कहानी लेखन, रचनात्मक गतिविधियों और संवादात्मक सत्रों में भाग लिया।
कार्यशाला का आयोजन 6 और 7 अक्टूबर को जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एक्शन (XISA), विधानसभा रोड रायपुर में आईआईएसईआर पुणे के केयर प्रोजेक्ट, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, यूनिसेफ और छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर के संयुक्त सहयोग से किया गया।

दूसरे दिन शिक्षकों ने अपनी कहानियां विकसित कर साझा कीं। स्थानीय परिवेश, दैनिक अनुभव और प्रकृति को कहानी से जोड़कर बच्चों की अवलोकन क्षमता, जिज्ञासा, कल्पनाशीलता, स्वतंत्र सोच और अभिव्यक्ति को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई।
‘कहानीकार पुस्तक मेला’ रहा आकर्षण
कार्यशाला में आयोजित ‘कहानीकार पुस्तक मेला’ शिक्षकों के लिए खास आकर्षण रहा। इसमें विभिन्न पुस्तकों और कहानियों से परिचित कराया गया तथा बताया गया कि किताबों को कक्षा की गतिविधियों से जोड़कर बच्चों में पढ़ने की रुचि और रचनात्मक सोच को बढ़ाया जा सकता है।

कार्यशाला में कहानी और कला के माध्यम से बच्चों को प्रकृति एवं पर्यावरण से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। बच्चों को अपने आसपास का अवलोकन करने, सवाल पूछने और अनुभवों को कहानी के रूप में व्यक्त करने के अवसर देने की बात कही गई।
इस दौरान भारत के पहले द्विभाषी हिंदी-अंग्रेजी क्लाइमेट टैब्लॉइड ‘जुगनू’ को भी प्रस्तुत किया गया। केयर प्रोजेक्ट की प्रोजेक्ट लीड एवं ‘जुगनू’ की पब्लिशर डॉ. शालिनी शर्मा ने बताया कि इसका उद्देश्य बच्चों और शिक्षकों की पर्यावरण, प्रकृति और स्थानीय अनुभवों से जुड़ी रचनात्मक सामग्री को मंच देना है।
समापन सत्र में शिक्षकों ने दो दिनों की सीख और अनुभव साझा किए। इसके बाद छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. शिरीष कुमार सिंह और एनआईटी रायपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राज कुमार साहू की उपस्थिति में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यशाला का मुख्य संदेश ‘आर्ट ऐस स्टोरी, स्टोरी ऐस नॉलेज, नॉलेज ऐस एक्शन’ रहा। इसके जरिए शिक्षा को बच्चों के स्थानीय परिवेश, प्रकृति और अनुभवों से जोड़कर अधिक रचनात्मक और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
प्रदीप मिश्रा
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