कलेक्टर ने बोया ‘शब्दबीज’, अब बच्चों के ज्ञान में उगेगा भविष्य
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
कलेक्ट्रेट परिसर में नवाचार का शुभारंभ, प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों में भाषा, सोच और अभिव्यक्ति क्षमता विकसित करने की पहल
सूरजपुर ACGN:- पौधे का बीज मिट्टी में बोया जाता है और समय के साथ वह वृक्ष बनकर फल देता है, लेकिन सूरजपुर में अब बच्चों के ज्ञान और अभिव्यक्ति का विकास करने के लिए ‘शब्दबीज’ बोने की अभिनव पहल शुरू की गई है। इसी सोच के साथ कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने 5 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रतीकात्मक रूप से ‘शब्दबीज’ बोकर इस नवाचार का शुभारंभ किया।

कलेक्टर द्वारा शब्दबीज बोने का यह आयोजन केवल प्रतीकात्मक गतिविधि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे जिले की प्राथमिक शिक्षा में भाषा और सीखने की संस्कृति को मजबूत करने के संकल्प के रूप में देखा गया। कलेक्टर ने कहा कि बच्चे जितने अधिक शब्दों से परिचित होंगे, उनकी सोच, संवाद और अभिव्यक्ति क्षमता उतनी ही बेहतर विकसित होगी। शब्दबीज का उद्देश्य बच्चों को केवल नए शब्द याद कराना नहीं, बल्कि शब्द से संवाद, संवाद से विचार और विचार से अभिव्यक्ति तक पहुंचाना है।

जिला प्रशासन और समग्र शिक्षा सूरजपुर की पहल से संचालित इस नवाचार का मूल मंत्र है ‘एक शब्द प्रतिदिन, ज्ञान का वृक्ष जीवनभर।’ इसके माध्यम से कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की शब्द-संपदा, भाषा कौशल, संवाद क्षमता, पठन, लेखन, समझ और अभिव्यक्ति क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
शब्दबीज में बच्चों को कठिन शब्दों का बोझ देने के बजाय उनके आसपास के जीवन, परिवेश और रोजमर्रा के अनुभवों से जुड़े शब्दों को सीखने और उनका व्यवहारिक इस्तेमाल करने का अवसर दिया जाएगा। इसकी सीखने की प्रक्रिया सुनेगा, बोलेगा, पढ़ेगा, लिखेगा, समझेगा, वाक्य बनाएगा और जीवन में प्रयोग करेगा के क्रम पर आधारित है।

कलेक्ट्रेट परिसर में हुए कार्यक्रम के दौरान शब्दबीज की अवधारणा, उद्देश्य और इसके क्रियान्वयन की जानकारी भी साझा की गई। नवाचार को जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालयों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए शिक्षकों को नियमित शब्द-अभ्यास, संवाद और गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
शब्दबीज की खासियत यह है कि इसमें शब्द केवल याद कराने के लिए नहीं होंगे, बल्कि उन्हें बच्चों के जीवन और व्यवहार से जोड़ा जाएगा। एक शब्द के साथ उसका अर्थ, उच्चारण, प्रयोग, वाक्य निर्माण और व्यवहारिक संदर्भ समझाया जाएगा। इससे धीरे-धीरे बच्चों की भाषा के साथ उनकी सोच और आत्मविश्वास को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम के दौरान ‘सूर्योदय सूरजपुर’ कार्ययोजना पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देने वाली इस पहल में विद्यालयों को केवल पढ़ाई कराने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक सीख और क्षमताओं के विकास का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया है।
‘सूर्योदय सूरजपुर’ का फोकस केवल परीक्षा परिणाम बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसके तहत यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि हर बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप पढ़ सके, समझ सके, गणना कर सके, सोच सके, सवाल पूछ सके, समस्या का समाधान कर सके और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख सके। शिक्षक की भूमिका, बच्चे की सीख और विद्यालय की कार्यसंस्कृति को एक साथ मजबूत करने की दिशा में गतिविधि आधारित शिक्षण, नवाचार, सतत मूल्यांकन और सीखने के परिणामों पर ध्यान दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य जिले के स्कूलों में गुणवत्ता, जवाबदेही और नवाचार की संस्कृति को मजबूत करना है। ‘शब्दबीज’ के जरिए जहां बच्चों की भाषा और अभिव्यक्ति को नई दिशा देने का प्रयास है, वहीं ‘सूर्योदय सूरजपुर’ के माध्यम से शिक्षा में ऐसा वातावरण तैयार करने की कोशिश की जा रही है, जहां हर बच्चे की प्रतिभा में सीखने का उजाला दिखाई दे।
प्रदीप मिश्रा
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