बारिश से नहीं, बदहाल ड्रेनेज से डूब रहा बरहमपुर? बहना नाला पर उठे सवाल
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बरहमपुर, ओडिशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनिल कुमार चौधरी, गंजाम
हर साल जलभराव से जूझते शहर को स्थायी समाधान की मांग, मुख्यमंत्री को सौंपा गया मांगपत्र
बरहमपुर ACGN:- बरहमपुर को सिल्क सिटी और स्मार्ट सिटी के नाम से जाना जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। पिछले सप्ताह लगातार बारिश के दौरान नीलांचल नगर, गजपति नगर, श्रीराम नगर, गांधी नगर, आस्का रोड और नीलाद्री बिहार जैसे निचले इलाकों में पानी भरने की बात सामने आई। इस स्थिति को लेकर अब शहर के ड्रेनेज सिस्टम और प्राकृतिक जल निकासी नालों पर अतिक्रमण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सहर तलि मिलित क्रियानुष्ठान कमेटी ने आरोप लगाया है कि बरहमपुर में जलभराव की समस्या केवल बारिश की वजह से नहीं, बल्कि प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था के कमजोर होने और नालों पर हुए अतिक्रमण के कारण भी गंभीर होती जा रही है। कमेटी का विशेष जोर बहना नाल को लेकर है, जिसे वह शहर की प्रमुख जल निकासी व्यवस्था बताती है।
इसी मुद्दे को लेकर कमेटी के अध्यक्ष संजिब कुमार पटनायक ने मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजकर बहना नाल की स्थिति का संयुक्त सर्वे कराने, अतिक्रमण हटाने और स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई करने की मांग की है। मांगपत्र की प्रतियां आवास एवं शहरी विकास विभाग, विभाग के प्रधान सचिव, गंजाम जिला मजिस्ट्रेट और बरहमपुर नगर निगम आयुक्त को भी सूचनार्थ भेजी गई हैं।
कमेटी के अनुसार बहना नाल फास्ट गेट से गोपालपुर जंक्शन तक करीब 14 किलोमीटर लंबा है और शहर के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से के पानी की निकासी इसी नाले से होती है। कमेटी का दावा है कि नाले के दोनों ओर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के कारण ड्रेनेज विभाग नाले के पूरे हिस्से तक पहुंच नहीं पा रहा है। इसी वजह से डी-सिल्टिंग के बावजूद कुछ समय बाद नाला फिर से मिट्टी और कचरे से भरने की स्थिति में आ जाता है।
कमेटी ने यह भी सवाल उठाया है कि करीब 14 किलोमीटर लंबे इस नाले की जिम्मेदारी आखिर किस विभाग की है। मांगपत्र में दावा किया गया है कि न तो बरहमपुर नगर निगम, न बीडीए और न ही जल संसाधन विभाग इसे पूरी तरह अपनी जिम्मेदारी मानता है। कमेटी ने इसी स्थिति को देखते हुए बहना नाल के लिए स्पष्ट विभागीय जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
कमेटी का कहना है कि हर साल डी-सिल्टिंग पर जोर देने के बजाय अब स्थायी समाधान की जरूरत है। इसके लिए नाले के दोनों तरफ कंक्रीट की सुरक्षा दीवार बनाने का सुझाव दिया गया है। कमेटी के मुताबिक इससे नाले का बहाव व्यवस्थित हो सकता है और भविष्य में जलभराव की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
मांगपत्र में यह भी दावा किया गया है कि यदि नाले के किनारे नियोजित तरीके से सड़क विकसित की जाए तो शहर की यातायात व्यवस्था को भी राहत मिल सकती है। कमेटी ने इसे बरहमपुर के लिए संभावित इनर रिंग रोड के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया है। उसका दावा है कि इससे पुराने शहर और आसपास की कई पंचायतों के बीच आवागमन आसान हो सकता है। हालांकि सड़क निर्माण और यातायात में कितनी वास्तविक राहत मिलेगी, यह विस्तृत तकनीकी सर्वे और व्यवहार्यता अध्ययन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कमेटी ने नाले की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को स्वास्थ्य से भी जोड़ते हुए कहा है कि लंबे समय तक जमा पानी मच्छरों के पनपने की वजह बन सकता है। इसलिए नाले का निर्बाध बहाव और आसपास की स्वच्छता व्यवस्था बेहतर करना जरूरी है। हालांकि मलेरिया और डेंगू पर इसका कितना सीधा प्रभाव पड़ेगा, यह स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और वैज्ञानिक अध्ययन से ही स्पष्ट होगा।
कमेटी ने मुख्यमंत्री से बहना नाल को विशेष परियोजना के रूप में लेकर तत्काल संयुक्त सर्वे कराने, अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो बरहमपुर और आसपास के लोग शांतिपूर्ण तरीके से बड़ा जनआंदोलन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
अब सवाल यह है कि बरहमपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर की जल निकासी व्यवस्था को केवल हर बारिश के बाद की अस्थायी सफाई तक सीमित रखा जाएगा या फिर बहना नाल समेत पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का वैज्ञानिक और स्थायी समाधान निकाला जाएगा। कमेटी की मांग के बाद गेंद अब संबंधित विभागों और प्रशासन के पाले में है।
प्रदीप मिश्रा
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