सामूहिक दुष्कर्म मामले में 6 दोषसिद्ध, दो को उम्रकैद
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
पुसौर के 2024 के मामले में विशेष न्यायालय का फैसला, चार आरोपियों को 20-20 साल की सजा; पीड़िता को प्रतिकर की अनुशंसा
संवाददाता :- संजय जेठवानी
रायगढ़ ACGN:- पुसौर थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में महिला से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी एक्ट), रायगढ़ ने 28 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। न्यायालय ने मामले में छह आरोपियों को दोषसिद्ध करते हुए दो को आजीवन कारावास और चार को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
पुलिस के अनुसार सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास से दंडित किया गया है। वहीं कृष्णा उर्फ राहुल चौहान, नरेन्द्र उर्फ छोटू सिदार, बबलू चौहान और राहुल खड़िया को सामूहिक दुष्कर्म की धारा 70(1) तथा विधि विरुद्ध जमाव की धारा 190 भारतीय न्याय संहिता के तहत 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है।
मेले में जाने के दौरान हुई थी घटना
अभियोजन के अनुसार घटना 19 अगस्त 2024 की शाम की है। पीड़िता अकेले पैदल मेला देखने जा रही थी। इसी दौरान मुख्य मार्ग पर उसकी मुलाकात पूर्व परिचित आरोपी कृष्णा उर्फ राहुल चौहान और उसके साथियों से हुई।
अभियोजन के अनुसार आरोपियों ने महिला को जबरन तालाब की ओर ले गए, जहां अन्य युवक भी पहुंचे और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद महिला को धमकाते हुए अपने साथ ले जाने का प्रयास किए जाने की बात भी अभियोजन में कही गई है।
पुलिस के अनुसार पीड़िता किसी तरह वहां से निकलकर गांव की महिलाओं के पास पहुंची और घटना की जानकारी दी। इसके बाद सरपंच को सूचना दी गई और 20 अगस्त 2024 को थाना पुसौर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 194/2024 दर्ज कर धारा 70(1), 140(3) और 351(3) भारतीय न्याय संहिता के तहत विवेचना शुरू की।
9 आरोपियों की हुई थी पहचान
पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान कुल 9 आरोपियों की पहचान हुई। इनमें से 8 को पकड़ा गया, जबकि दो विधि से संघर्षरत बालक पाए गए। एक अन्य विधि से संघर्षरत बालक फरार था, जिसकी मृत्यु हो जाने के कारण उसे प्रकरण से पृथक किया गया। दोनों विधि से संघर्षरत बालकों के विरुद्ध पृथक से किशोर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
मामले की प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी पुसौर निरीक्षक रोहित बंजारे ने की। बाद में तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक आकाश शुक्ला (IPS) ने विवेचना की। विवेचना के दौरान सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं 3(1)(s), 3(1)(r) और 3(2)(v) भी जोड़ी गईं।
पुलिस के अनुसार सभी संबंधित आरोपियों के विरुद्ध धाराओं के आधार पर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
गवाहों की समय पर कराई गई उपस्थिति
पुलिस के मुताबिक वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में मामले के सभी साक्षियों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराई गई। पुलिस का कहना है कि तत्कालीन CSP आकाश शुक्ला की विवेचना और विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल की पैरवी से अभियोजन को न्यायालय में अपना पक्ष रखने में मदद मिली।
विशेष न्यायालय के फैसले में छह आरोपियों को दोषसिद्ध किया गया और सजा सुनाई गई। न्यायालय ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति योजना के तहत नियमानुसार प्रतिकर राशि दिए जाने की अनुशंसा भी की है।
एसएसपी ने कहा- गंभीर अपराधों में साक्ष्य आधारित कार्रवाई प्राथमिकता
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं और कमजोर वर्गों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों में पुलिस संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ कार्रवाई करती है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में साक्ष्य आधारित विवेचना, आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायालय में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में पुलिस विवेचना और अभियोजन की पैरवी के परिणामस्वरूप आरोपियों को कठोर दंड मिला है, जिसे पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
प्रदीप मिश्रा
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