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खदानें चल रहीं, गांव की राहें थमीं! 15 दिन की चेतावनी लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे केसला के ग्रामीण

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

ट्रैक्टरों में भरकर पहुंचे ग्रामीण, बच्चों को साथ लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंचीं; सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, स्कूल, पुलिया और बस सुविधा की मांग, एसईसीएल से विकास कार्य कराने की उठी आवाज

कोरबा ACGN:- एसईसीएल के खनन प्रभावित क्षेत्र में बसे केसला गांव के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देता नजर आ रहा है। गांव की मूलभूत समस्याओं को लेकर सोमवार को ग्राम पंचायत गोड़मा के आश्रित ग्राम केसला और आसपास के ग्रामीण ट्रैक्टरों में भरकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर जनदर्शन में पहुंचीं। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिया, खेल मैदान और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग उठाई।


ग्रामीणों का कहना है कि केसला एसईसीएल के प्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र में आता है। खनन गतिविधियों से क्षेत्र की परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं, लेकिन गांव की जरूरी सुविधाओं का सवाल अभी भी बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार एसईसीएल के सीएसआर अथवा अन्य उपलब्ध मदों से गांव में जनहित के पर्याप्त कार्य स्वीकृत नहीं किए जा रहे हैं। वहीं जिला खनिज संस्थान न्यास मद से प्रस्तावित कुछ कार्यों को तकनीकी स्वीकृति मिलने के बावजूद प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने की बात भी ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में कही है।


           स्वास्थ्य केंद्र से स्कूल उन्नयन तक की मांग
ग्रामीणों ने केसला में उप स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति की मांग की है। उनका कहना है कि गांव में स्वास्थ्य सुविधा की जरूरत है और इसके लिए ग्रामीणों को दूर जाना पड़ता है।
प्राथमिक शाला केसला को माध्यमिक शाला में उन्नयन करने की मांग भी रखी गई है। साथ ही बच्चों को हाईस्कूल तक आने-जाने के लिए स्कूल बस की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
केसला में खेल मैदान बनाने की मांग भी ग्रामीणों ने रखी है। उनका कहना है कि बच्चों और युवाओं के लिए खेल गतिविधियों के लिए उचित स्थान उपलब्ध होना जरूरी है।


              पुलिया और सड़क का सवाल सबसे बड़ा
केसला घाट में पुलिया और सड़क निर्माण को लेकर भी ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। बारिश के दौरान आवागमन में होने वाली परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने इस काम को प्राथमिकता से कराने की मांग की है।
ज्ञापन में सामुदायिक भवन से वालिनखार टोला होते हुए ईश्वर अगरिया घर तक सीसी रोड तथा केसला में दिलीप यादव के घर से सोनाराम के घर तक सीसी रोड निर्माण की मांग शामिल है।
इसके अलावा गांव के अलग-अलग मोहल्लों में मंच निर्माण की मांग भी की गई है। ग्रामीणों ने पेनसी ठाम यादव के घर के पास, गगदेई मोहल्ले में मुकेश के घर के पास और यासीनखाट मोहल्ले में रवि के घर के पास मंच निर्माण की मांग रखी है।


           हाथी प्रभावित क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की मांग
केसला को हाथी प्रभावित क्षेत्र बताते हुए ग्रामीणों ने एसईसीएल क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्र में सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि खनन प्रभावित क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए प्रकाश व्यवस्था को केवल सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी सुरक्षा व्यवस्था के रूप में देखा जाए।


    केसला के साथ केमलपुर और बासीनवार भी परेशान
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम केसला, केमलपुर और बासीनवार में सीसी रोड निर्माण की मांग को लेकर अलग आवेदन भी दिया है। आवेदन में कहा गया है कि बरसात के दिनों में लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने श्यामलाल के घर से अशोक अगरिया के घर तक करीब 250 मीटर, बासीनवार सामुदायिक भवन से बानंद बगारिमा के घर की ओर करीब 300 मीटर और बासीनवार सिंह के घर से छतरपाल के घर की ओर करीब 400 मीटर सीसी रोड की मांग की है। इसके साथ सलपुर मुख्य मार्ग से प्राथमिक शाला की ओर भी सीसी रोड निर्माण की मांग रखी गई है।


     डीएमएफ और एसईसीएल से विकास कार्यों की मांग
ग्रामीणों ने जिला खनिज संस्थान न्यास मद तथा एसईसीएल के सीएसआर अथवा अन्य उपलब्ध मद से इन कार्यों को स्वीकृति देने की मांग की है। ग्रामीणों का तर्क है कि जब उनका गांव प्रत्यक्ष खनन गतिविधियों से प्रभावित है, तो क्षेत्र के विकास और नागरिक सुविधाओं पर भी प्राथमिकता से काम होना चाहिए।
   15 दिन की मोहलत, फिर खदान बंद कराने की चेतावनी
ग्रामीणों ने ज्ञापन में प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन को 15 दिनों की समय-सीमा देते हुए कड़ा रुख अपनाया है। आवेदन में कहा गया है कि यदि इस अवधि में प्रस्तावित निर्माण कार्यों को स्वीकृति नहीं दी जाती है, तो ग्रामीण एसईसीएल उजगामार-गोड़मा 10 नंबर खदान का उत्पादन पूर्ण रूप से बंद कराने के लिए कदम उठाएंगे।
ज्ञापन में ऐसी स्थिति में प्रबंधन और शासन-प्रशासन को होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी भी प्रबंधन तथा शासन-प्रशासन पर होने की बात कही गई है। यह चेतावनी ग्रामीणों ने अपने आवेदन में दर्ज कराई है।
            अब सवाल गांव की जमीन से उठ रहा है
केसला के ग्रामीणों का कलेक्ट्रेट तक पहुंचना बताता है कि मामला केवल कुछ सीसी रोड या भवनों की स्वीकृति तक सीमित नहीं है। ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के साथ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि खनन प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों के विकास और सुविधाओं को कितनी प्राथमिकता मिल रही है।
अब प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने ग्रामीणों की मांगों पर कार्रवाई का सवाल है। 15 दिन की समय-सीमा के भीतर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर केसला सहित आसपास के ग्रामीणों की नजर रहेगी।
          सेवा संकल्प पखवाड़े के बीच उठता बड़ा सवाल
इसी समय प्रदेश में सेवा संकल्प पखवाड़े के तहत जनसेवा और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न अभियान चल रहे हैं। ऐसे में केसला के ग्रामीणों की तस्वीर और उनकी समस्याएं एक अलग सवाल खड़ा करती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सेवा केवल कार्यक्रमों, दीप जलाने या तस्वीरों तक सीमित न रहकर तब पूरी मानी जाएगी, जब सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षित आवागमन जैसी जरूरतें वास्तव में गांव तक पहुंचें।
क्या किसी खनन प्रभावित गांव के लिए उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाना ही सबसे बड़ा सेवा संकल्प नहीं होना चाहिए?
अब नजर इस बात पर है कि सेवा संकल्प के इस दौर में केसला जैसे खनन प्रभावित गांव की आवाज कागज से निकलकर धरातल तक कब पहुंचती है।


प्रदीप मिश्रा
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