भारतमाला 130A पर मुआवजे का घमासान! पुरानी दरों पर अटकी किसानों की उम्मीद
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता – संजय जेठवानी रायगढ़
20 फरवरी से नई कलेक्टर गाइड लाइन लागू होने का हवाला, भू-स्वामियों ने 21 फरवरी 2026 को आधार तिथि मानने और अवार्ड से पहले पुनर्गणना की उठाई मांग
रायगढ़ ACGN:- भारतमाला परियोजना-130A के तहत धरमजयगढ़ क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण को लेकर मामला गरमाता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किमी 114.410 से किमी 121.450 तक करीब 7.04 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही निजी भूमि के भू-स्वामियों ने मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सह भू-अर्जन अधिकारी, धरमजयगढ़ के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किया है।
भू-स्वामियों का कहना है कि उनकी जमीन के बाजार मूल्य और प्रतिकर की गणना वर्ष 2025 की कलेक्टर गाइडलाइन दरों के आधार पर की जा रही है, जबकि रायगढ़ जिले में 20 फरवरी 2026 से पुनरीक्षित कलेक्टर गाइडलाइन और सर्किल दरें प्रभावशील हो चुकी थीं। ऐसे में उनका कहना है कि नई प्रभावशील दरों को ध्यान में रखे बिना मुआवजा तय किए जाने से उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है।

21 फरवरी की तारीख पर टिका पूरा विवाद
भू-स्वामियों के अभ्यावेदन में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3A के तहत जारी प्रारंभिक अधिसूचना का भी उल्लेख किया गया है। आवेदन के अनुसार यह अधिसूचना भारत के राजपत्र में 17 फरवरी 2026 को प्रकाशित हुई थी, जबकि स्थानीय समाचार पत्रों में इसका प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को हुआ।
भू-स्वामियों का प्रमुख विधिक तर्क यह है कि समाचार पत्र में आवश्यक प्रकाशन की अंतिम तिथि 21 फरवरी होने के कारण बाजार मूल्य निर्धारण के लिए इसी तारीख को आधार माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि 20 फरवरी 2026 से नई कलेक्टर गाइडलाइन प्रभावी हो चुकी थी, इसलिए 21 फरवरी को लागू नई दरों के बजाय पुरानी दरों के आधार पर मुआवजा निर्धारित करना उनके आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकता है।
नोटिस में गणना का पूरा ब्यौरा नहीं होने का दावा
भू-स्वामियों ने 8 सितंबर 2026 को जारी नोटिस को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। अभ्यावेदन में कहा गया है कि प्रत्येक खातेदार की अधिग्रहित भूमि का स्पष्ट खसरा नंबर, प्रभावित रकबा, लागू बाजार दर, प्रतिकर राशि और पूरी गणना का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
भू-स्वामियों ने प्रशासन से मांग की है कि पहले प्रत्येक खसरा नंबर के हिसाब से विस्तृत गणना पत्रक दिया जाए। इसके बाद उन्हें उस गणना पर आपत्ति दर्ज करने और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। उनका कहना है कि आपत्तियों का निराकरण किए बिना कोई एकपक्षीय कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
अभ्यावेदन में भू-स्वामियों ने Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 की धारा 26 और धारा 30 के साथ प्रथम अनुसूची तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों का हवाला दिया है।
इसके अलावा Union of India v. Tarsem Singh, (2019) 9 SCC 304 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण में मिलने वाले वैधानिक लाभों को मुआवजा निर्धारण में शामिल करने की मांग की गई है। अभ्यावेदन के अनुसार मद्रास उच्च न्यायालय के National Highways Authority of India बनाम S. Rudra Devi, W.A. (MD) Nos. 273 & 274 of 2026, दिनांक 06 मार्च 2026 के आदेश सहित अन्य दस्तावेज भी आवेदन के साथ संलग्न किए गए हैं।
विकास क्षेत्र में जमीन, भविष्य के मूल्य का सवाल
भू-स्वामियों ने अपनी जमीन की स्थिति को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि अधिग्रहण वाली भूमि धरमजयगढ़ नगरीय क्षेत्र, राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रस्तावित कोल ब्लॉकों और अन्य विकास गतिविधियों के आसपास स्थित है। ऐसे में जमीन की वर्तमान और भविष्य की उपयोगिता तथा बाजार मूल्य को नजरअंदाज कर केवल पुरानी कृषि दरों को आधार बनाकर प्रतिकर तय करने से वास्तविक आर्थिक नुकसान हो सकता है।
हालांकि इन सभी दावों और कानूनी व्याख्याओं पर अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया और लागू कानूनों के आधार पर होना है। फिलहाल भू-स्वामियों ने अपनी आपत्तियों और मांगों को प्रशासन के समक्ष विधिवत रखा है।
अवार्ड से पहले मुआवजे की गणना सुधारने की मांग
भू-स्वामियों ने अंतिम अवार्ड पारित होने से पहले मुआवजे की पूरी गणना की समीक्षा करने और 20 फरवरी 2026 से प्रभावी पुनरीक्षित कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर पुनर्निर्धारण की मांग की है। साथ ही प्रत्येक खसरा नंबर के लिए प्रभावित रकबा, लागू दर, गुणन कारक, 100 प्रतिशत सोलैटियम और ब्याज सहित विस्तृत गणना पत्रक उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है।
अभ्यावेदन में व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने और आपत्तियों का विधिवत निराकरण होने तक 8 सितंबर के नोटिस के आधार पर किसी एकपक्षीय कार्रवाई पर रोक रखने की मांग भी की गई है। अब देखना यह होगा कि भू-स्वामियों द्वारा उठाए गए नई गाइडलाइन और 21 फरवरी 2026 की आधार तिथि से जुड़े तर्क पर प्रशासन और भू-अर्जन प्राधिकारी किस तरह विचार करते हैं और अंतिम मुआवजा निर्धारण किस आधार पर किया जाता है।
प्रदीप मिश्रा
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