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छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल के बाहर  निजी क्लीनिक और जांच का खेल?सरकारी अस्पताल आए, निजी सेंटर पहुंच गए!

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सूरजपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


जिला अस्पताल के आसपास निजी पैथोलॉजी, सोनोग्राफी सेंटर और क्लीनिकों का संचालन चर्चा में, मरीजों को निजी संस्थानों में भेजे जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग


संवाददाता :- सौरभ साहू

सूरजपुर ACGN:- जिला अस्पताल सूरजपुर में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को लेकर एक गंभीर सवाल सामने आया है। अस्पताल के आसपास संचालित निजी पैथोलॉजी लैब, सोनोग्राफी सेंटर और डॉक्टरों की निजी क्लीनिकों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकारी अस्पताल में आने वाले कुछ मरीजों को जांच और उपचार के लिए निजी संस्थानों की ओर भेजा जाता है।
हालांकि, मरीजों को निजी संस्थानों में भेजने अथवा किसी प्रकार के कमीशन के लेन-देन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यह स्थिति सिर्फ सूरजपुर में ही नहीं छत्तीसगढ़ के कई जिलों में निर्मित है, शिकायतों के बाद भी नहीं होती कार्यवाही सिर्फ कागजों पर चल रहा है जांच का खेल


              गरीब मरीजों की जेब पर कितना बोझ?
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में यदि उन्हें निजी जांच केंद्रों या क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है, तो जांच और इलाज का अतिरिक्त खर्च उनके लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के आसपास संचालित निजी संस्थानों में मरीजों की आवाजाही लगातार दिखाई देती है। ऐसे में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि मरीज अपनी जरूरत के अनुसार स्वेच्छा से निजी संस्थानों में जा रहे हैं या उन्हें किसी स्तर से वहां जाने की सलाह दी जा रही है।


                  कमीशन का आरोप कितना सच?
इस पूरे मामले में कुछ लोगों की ओर से मरीजों को निजी संस्थानों में भेजने के पीछे कमीशन के खेल की आशंका भी जताई जा रही है। लेकिन यह फिलहाल आरोप है और इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। यदि जांच में किसी सरकारी कर्मचारी या चिकित्सक द्वारा नियमों के विपरीत मरीजों को किसी खास निजी संस्थान में भेजने या आर्थिक लाभ लेने की पुष्टि होती है, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।


      200 मीटर के दायरे का सवाल भी जांच के घेरे में
जिला अस्पताल के आसपास निर्धारित दूरी के भीतर निजी पैथोलॉजी, सोनोग्राफी सेंटर और क्लीनिकों के संचालन को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। लोगों की मांग है कि प्रशासन यह स्पष्ट करे कि अस्पताल के आसपास संचालित ऐसे सभी संस्थानों के पास आवश्यक पंजीयन, अनुमति, तकनीकी विशेषज्ञता और अन्य वैधानिक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
साथ ही यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित संस्थान निर्धारित नियमों और स्वास्थ्य विभाग के प्रावधानों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं या नहीं।


         अस्पताल की सुविधाओं की भी हो समीक्षा
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सरकारी अस्पताल की उपलब्ध सुविधाएं हैं। यदि जिला अस्पताल में आवश्यक जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो मरीजों को बाहर जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? और यदि कोई जांच या सुविधा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, तो प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को उचित और पारदर्शी तरीके से जानकारी मिले।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सुलभ और भरोसेमंद उपचार उपलब्ध कराना है। इसलिए अस्पताल की जांच सुविधाओं, दवाइयों की उपलब्धता और चिकित्सकीय सेवाओं की भी समीक्षा जरूरी है।
अब प्रशासन की बारी है
मरीजों और उनके परिजनों ने जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग से जिला अस्पताल के आसपास संचालित निजी पैथोलॉजी लैब, सोनोग्राफी सेंटर और क्लीनिकों का निरीक्षण कराने की मांग की है।
साथ ही अस्पताल में पदस्थ चिकित्सकों और कर्मचारियों द्वारा मरीजों को निजी संस्थानों में भेजे जाने संबंधी आरोपों की भी जांच की मांग उठी है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या अनावश्यक रूप से मरीजों को निजी संस्थानों में भेजे जाने की पुष्टि होती है, तो कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं संबंधित निजी संस्थानों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर भी मिलना चाहिए।
आखिर सरकारी अस्पताल गरीब मरीजों के लिए राहत का केंद्र बनेगा या निजी जांच और इलाज की ओर जाने का रास्ता? सूरजपुर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही इन सवालों का जवाब सामने आएगा।

प्रदीप मिश्रा
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