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कोयलांचल में यूनियन की परीक्षा, भटगांव में HMS की अग्निपरीक्षा!

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सूरजपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

कुसमुंडा AHQ में HMS के दोनों धड़ों को मिले सिर्फ 10 वोट, अब भटगांव-विश्रामपुर के नतीजों पर टिकी निगाहें

सूरजपुर ACGN:- कोयलांचल क्षेत्र में श्रमिक संगठनों की सदस्यता सत्यापन प्रक्रिया इन दिनों जोर पकड़ रही है। कोयला खदानों में श्रमिकों के बीच अपनी पकड़ और प्रभाव साबित करने के लिए विभिन्न यूनियनें मैदान में हैं। BMS, INTUC, AITUC और HMS जैसे प्रमुख श्रमिक संगठनों के बीच होने वाला मेंबरशिप वेरिफिकेशन यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि श्रमिकों के बीच किस संगठन की पकड़ कितनी मजबूत है।
इसी बीच छत्तीसगढ़ के कोयलांचल क्षेत्र में HMS को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भटगांव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लंबे समय तक मजबूत श्रमिक आधार रखने वाली HMS अब अलग-अलग धड़ों में बंटी नजर आ रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संगठन के भीतर विवाद और गंभीर आरोपों के बाद HMS से जुड़े कुछ नेताओं ने अलग होकर KMS/HMS और KMP/HMS के नाम से संगठनात्मक गतिविधियां शुरू की हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसका असर सदस्यता सत्यापन के आंकड़ों में कितना दिखाई देता है, इसकी चर्चा कोरबा के कुसमुंडा AHQ के हालिया सत्यापन के बाद और तेज हो गई है। 2 सितंबर 2026 को हुए यूनियन सिंगल मेंबरशिप वेरिफिकेशन में कुल 169 सदस्य दर्ज हुए। इनमें BMS को MR में 17 और DR में 55, यानी कुल 72 मत मिले। INTUC को MR में 11 और DR में 39, कुल 50 मत मिले। AITUC को MR में 10 और DR में 27, कुल 37 मत प्राप्त हुए।
वहीं KMS/HMS को MR में 1 और DR में 8, कुल 9 मत मिले, जबकि KMP/HMS को DR में केवल 1 मत मिला। इस तरह HMS से जुड़े दोनों धड़ों को मिलाकर कुल 10 मत ही मिले। इन आंकड़ों ने कोयलांचल के श्रमिक राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
अब सबसे ज्यादा निगाहें SECL के भटगांव और विश्रामपुर क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। यहां सदस्यता सत्यापन के दौरान HMS और उससे जुड़े अलग-अलग धड़ों की वास्तविक स्थिति कितनी मजबूत है, यह आने वाले आंकड़ों से स्पष्ट होगा। खासकर भटगांव क्षेत्र में दशकों से श्रमिकों के बीच अपनी पहचान रखने वाली HMS क्या अपनी पुरानी स्थिति कायम रख पाएगी या संगठनात्मक बंटवारे का असर उसकी सदस्यता पर दिखाई देगा, यह सवाल फिलहाल चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
कोयला खदानों में यूनियन की सदस्यता महज संख्या का खेल नहीं होती, बल्कि यह श्रमिकों के बीच संगठन की स्वीकार्यता और भरोसे का भी संकेत मानी जाती है। ऐसे में भटगांव क्षेत्र के आगामी आंकड़े न केवल विभिन्न यूनियनों की ताकत का आईना होंगे, बल्कि HMS के लिए भी अपनी जमीनी पकड़ साबित करने की महत्वपूर्ण परीक्षा माने जा रहे हैं।
कुसमुंडा AHQ के आंकड़ों ने जहां BMS, INTUC और AITUC की स्थिति सामने रखी है, वहीं HMS के दोनों धड़ों को मिले सीमित मतों ने संगठनात्मक एकजुटता और श्रमिकों के बीच प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब इन सवालों का जवाब भटगांव और विश्रामपुर की सदस्यता सत्यापन रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

प्रदीप मिश्रा
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