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जवाली में गूंजा ‘सेवा जोहार’, आदिवासी एकता और संस्कृति के रंग में रंगा पूरा गांव

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- दीपक पटेल

विश्व आदिवासी दिवस पर पहली बार भव्य आयोजन, पारंपरिक वेशभूषा में निकली रैली; जल-जंगल-जमीन और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

कोरबा ACGN:- विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जवाली में आदिवासी समाज द्वारा पहली बार भव्य और उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। पूरे कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक एकता की झलक दिखाई दी। बारिश के बीच भी समाज के महिला, पुरुष, युवा और बच्चों का उत्साह कम नहीं हुआ। ‘सेवा जोहार’ और ‘हम आदिवासी आन’ जैसे पारंपरिक नारों और गीतों से जवाली का वातावरण गूंज उठा।
पूजा-अर्चना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ


कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकालीन सत्र में पेन पुरुषों तथा देवी-देवताओं की सेवा-अर्जी और पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद पारंपरिक गीत-संगीत के बीच रैली निकाली गई। आदिवासी वेशभूषा में सजे छोटे बच्चों से लेकर महिला, पुरुष और युवाओं ने रैली में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
रैली गांव के प्रमुख चौक-चौराहों से होकर गुजरी। विभिन्न स्थानों पर विराजित देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और दीप प्रज्ज्वलन किया गया। बारिश के बावजूद आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
जल-जंगल-जमीन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश


कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की प्रकृति के साथ जुड़ी परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समुदाय सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की परंपरा को आगे बढ़ाता आया है। इसी संदेश को मजबूत करते हुए वृक्षारोपण किया गया।
कंवर समाज भवन के प्रस्तावित स्थल तथा दान में प्राप्त भूमि पर भी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया। आयोजन में प्रकृति को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने का संदेश दिया गया।
भूमि दानदाताओं और समाजहित में कार्य करने वालों का सम्मान


रैली के समापन के बाद श्रद्धालुओं एवं उपस्थित समाजजनों के लिए खिचड़ी प्रसाद की व्यवस्था की गई। मंचीय कार्यक्रम में अतिथियों का गमछा और श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। समाज भवन के लिए भूमि दान करने वाले दानदाताओं को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
जवाली रेलवे स्टेशन का नाम कटघोरा किए जाने के विरोध में प्रशासन तक समाज की समस्या और मांग पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले केशी आदिवासी का भी सम्मान किया गया।
शिक्षा, जागरूकता और अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान
मंच से वक्ताओं ने आदिवासी संस्कृति की उत्पत्ति, मूलनिवासी परंपराओं तथा छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन की शुरुआत सहित विभिन्न विषयों पर विचार रखे। समाज के लोगों से शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने, जागरूक बनने, संगठित रहने और अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया गया।
वक्ताओं ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रयासों के तहत 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाने की परंपरा स्थापित हुई और वर्ष 1994 से यह दिवस दुनिया भर में आदिवासी समुदाय द्वारा अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों के सम्मान के रूप में मनाया जा रहा है।
समाज भवन और पेयजल व्यवस्था को लेकर हुई घोषणाएं
आयोजन के दौरान आगामी वर्षों में समाज भवन निर्माण, पेयजल व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही गई। जिला पंचायत सदस्य सुषमा रवि रजक ने बोरवेल के माध्यम से पानी की व्यवस्था कराने की घोषणा की। जनपद सदस्य कमल बेलदार ने देखरेख एवं सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग का भरोसा दिलाया।
जवाली इकाई के सामाजिक अध्यक्ष लतलू गोटिया ने आगामी वर्षों में ढोल, नगाड़े, मांदर, मंजीरे सहित पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित करती रैली और झांकी आयोजित करने का संकल्प लिया।
मातृशक्ति, बालशक्ति और युवाशक्ति की रही विशेष भागीदारी


कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय की मातृशक्ति, बालशक्ति और युवाशक्ति ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। अतिथियों में माया रूपेश कंवर (अधिवक्ता), विजय प्रताप सिंह, संतोष कंवर, राज नारायण, भुवन पाल, मंगल सिंह बैगा, मोहर सिंह, ओमप्रकाश, राज सिंह, जगदीश गुरुजी, राजेंद्र कंवर, जयपाल सिंह, भुवनेश्वर, महेंद्र पाल और संजू सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
अन्य समाजों की ओर से विपिन महाराज, गौकरण साहू, हेमलाल पटेल सहित अन्य लोगों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
पुलिस प्रशासन के सहयोग से शांतिपूर्ण रहा आयोजन
विश्व आदिवासी दिवस के इस आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में बाकी मोंगरा क्षेत्र के पुलिस प्रशासन का भी विशेष सहयोग रहा। सुरक्षा व्यवस्था के कारण रैली और अन्य कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुए।
जवाली में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस का यह कार्यक्रम केवल एक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता और आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की प्रतिबद्धता का संदेश भी देता नजर आया। पूरे आयोजन में ‘सेवा जोहार’ की भावना के साथ समाज को शिक्षित, जागरूक और संगठित बनाने का संकल्प प्रमुखता से सामने आया।

प्रदीप मिश्रा
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