बस्तर के जैविक उत्पाद पहुंचेंगे यूरोप, नक्सल मुक्त गांवों को मिलेगा विकास का नया मॉडल – उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय
जैविक खेती को वैश्विक बाजार से जोड़ने, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास, विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की दो बड़ी पहल
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर की जैविक खेती को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत, ग्रामीण विकास तथा गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित दो उच्चस्तरीय बैठकों में बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित वैश्विक बाजार तक पहुंचाने तथा नक्सल प्रभावित जिलों में पुनर्वास, विकास और राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बस्तर के ऐसे गांवों की पहचान की जाए, जहां किसानों ने आज तक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। इन गांवों का राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणन कराया जाएगा, जिससे वहां उत्पादित कृषि एवं वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर मूल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि जैविक प्रमाणन के बाद किसानों को वर्तमान कीमत की तुलना में तीन से चार गुना अधिक मूल्य मिलने की संभावना है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों में एपीडा, कृषि विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त दल सर्वे, परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों के माध्यम से उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा तथा बिहान के “छत्तीसकला” ब्रांड के जरिए जैविक उत्पादों के निर्यात की कार्ययोजना बनाई जाएगी। उप मुख्यमंत्री ने बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए जैविक प्रमाणन के लिए आवश्यक तीन वर्ष की अनिवार्य अवधि में छूट देने हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के भी निर्देश दिए।

दूसरी समीक्षा बैठक में गृह मंत्री के रूप में श्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रभावित जिलों में विकास और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन नक्सल प्रकरणों में गंभीर जनहानि नहीं हुई है, उनकी विधिसम्मत समीक्षा कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत देने की दिशा में कार्रवाई की जाए। इसके लिए शासकीय वकीलों और अभियोजन अधिकारियों की विशेष टीम गठित होगी तथा प्रत्येक सप्ताह संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
उन्होंने घोषणा की कि पूर्व के अति नक्सल प्रभावित 50 गांवों में एक-एक करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाएंगे। इनमें सुकमा के 20, बीजापुर के 20 तथा नारायणपुर के 10 गांव शामिल हैं। साथ ही आगामी 15 अगस्त 2026 तक सभी नक्सल मुक्त गांवों में तिरंगा यात्रा एवं ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित कर राष्ट्रीय एकता और विश्वास का संदेश दिया जाएगा।
बैठक में नक्सल पीड़ित एवं पुनर्वासित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के विशेष प्रावधानों के तहत आवास उपलब्ध कराने, शहीद जवानों एवं पीड़ित नागरिकों की स्मृति में सामुदायिक स्मारक बनाने, पुनर्वासित युवाओं को घोषित प्रोत्साहन राशि एक माह के भीतर प्रदान करने तथा नक्सल पीड़ितों से संबंधित सभी जानकारी डिजिटल डैशबोर्ड में दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही माओवादियों द्वारा लूटे गए हथियारों की बरामदगी के लिए अंतर्राज्यीय समन्वय बढ़ाने और जंगलों में कोई हथियार शेष न रहे, यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठकों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव सुश्री निहारिका सिंह बारिक, सचिव श्री भीम सिंह, सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, सचिव श्री धर्मेश साहू, एडीजी श्री विवेकानंद सिन्हा, एपीडा, कृषि विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदीप मिश्रा
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