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भैयाथान जनपद में तिमाही बैठकों पर उठे सवाल, उपस्थिति रजिस्टर को लेकर मचा बवाल

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सूरजपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता सौरभ साहू

नियम के मुताबिक हर तीन महीने में बैठक जरूरी, लेकिन 2025 में केवल तीन बैठकें और 2026 में अब तक एक भी नहीं

सूरजपुर जिले के भैयाथान जनपद पंचायत में सामान्य सभा की तिमाही बैठकों की नियमितता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों के अनुसार जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक प्रत्येक तीन महीने में कम से कम एक बार आयोजित किया जाना अनिवार्य होता है और दो बैठकों के बीच का अंतर तीन महीने से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद उपलब्ध अभिलेखों से यह सामने आया है कि वर्ष 2025 में केवल तीन बैठकें ही आयोजित की गईं, जबकि वर्ष 2026 में अब तक एक भी बैठक नहीं हो सकी है। वर्ष 2025 की अंतिम बैठक के बाद लगभग सात महीने का लंबा अंतराल हो जाना नियमों के पालन पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।


सूचना के अधिकार के तहत दिए गए आधिकारिक जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी बैठक में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को शामिल नहीं होने दिया गया और न ही किसी को प्रतिनिधि के रूप में बैठने की अनुमति दी गई। जवाब में यह भी कहा गया है कि इस प्रकार की व्यवस्था के लिए कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।


हालांकि दूसरी ओर विभिन्न माध्यमों से सामने आए फोटो, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। इनमें कुछ लोग स्वयं को बैठक में उपस्थित बताते हुए गतिविधियों में भागीदारी का दावा करते नजर आ रहे हैं, जिससे पूरे मामले को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।


मामले का सबसे संवेदनशील पहलू उपस्थिति रजिस्टर को लेकर सामने आया है। यदि बैठकों में केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही उपस्थित थे तो उपस्थिति पंजी में दर्ज हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। यह भी जानकारी सामने आ रही है कि कुछ जनप्रतिनिधि शपथ ग्रहण के बाद से अब तक किसी भी बैठक में शामिल नहीं हुए, इसके बावजूद उपस्थिति रजिस्टर में उनके नाम के सामने हस्ताक्षर दर्ज दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न और गंभीर हो जाता है कि संबंधित हस्ताक्षर वास्तव में किसके द्वारा किए गए।


उपलब्ध तथ्यों और सामने आ रहे दावों के बीच के अंतर को देखते हुए अब बैठकों से जुड़े सभी अभिलेखों को सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है। इसमें उपस्थिति पंजी, कार्यवाही विवरण, बैठक से जुड़े फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग तथा सभाकक्ष में लगे सीसीटीवी फुटेज को सामने लाने की मांग की जा रही है।


जानकारों का कहना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी की गई हैं तो इन अभिलेखों को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर आधिकारिक जवाब है तो दूसरी ओर सामने आ रहे दृश्य प्रमाण, दोनों के बीच का अंतर अब स्पष्टता की मांग कर रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित अधिकारी इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

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