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विशिष्ट अतिथि गृह में अफसरों की शराब पार्टी से खुली बिजली कंपनी की कार्यसंस्कृति,क्या बड़े अफसरों के लिए तबादला ही कार्रवाई

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी मर्यादित के डीएसपीएम ताप विद्युत गृह के वीआईपी रेस्ट हाउस में खुली शराब पार्टी, कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी मर्यादित के अंतर्गत संचालित डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह के विशिष्ट अतिथि गृह (वीआईपी रेस्ट हाउस) से सामने आई एक घटना ने विभागीय अनुशासन और कार्यसंस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी विश्राम गृह में बिजली कंपनी के कुछ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से शराब और सिगरेट की पार्टी किए जाने का मामला उस समय उजागर हुआ जब उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन अचानक वहां पहुंच गए।


मिली जानकारी के अनुसार अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिल्हा विधायक धर्मलाल कौशिक कोरबा आए हुए थे और वे कोरबा पूर्व स्थित डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह परिसर के इसी वीआईपी रेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। शाम के समय उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन, कोरबा महापौर संजू देवी राजपूत और भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी विधायक से मुलाकात करने के लिए रेस्ट हाउस पहुंचे।

बताया जाता है कि जैसे ही मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि विधायक से मिलने के लिए कमरे की ओर बढ़े, वहां का दृश्य देखकर सभी चौंक गए। कमरे के भीतर बिजली कंपनी के कुछ अधिकारी आराम से बैठे हुए शराब पी रहे थे और सिगरेट का सेवन कर रहे थे। टेबल पर शराब की बोतलें और गिलास रखे हुए थे और माहौल पूरी तरह निजी पार्टी जैसा दिखाई दे रहा था। सरकारी विश्राम गृह में इस तरह की गतिविधि सामने आने से मौके पर मौजूद लोगों में भी नाराजगी और असहजता देखी गई।

वायरल तस्वीरों और वीडियो में दावा किया जा रहा है कि रेस्ट हाउस के कमरों में कुछ अधिकारी बैठकर शराब पीते हुए नजर आ रहे हैं। तस्वीरों में दिखाई दे रहे व्यक्तियों के संबंध में यह भी कहा जा रहा है कि उनमें कंपनी का एक केमिस्ट और कुछ अन्य लोग शामिल हैं।


सूत्रों के अनुसार इस कथित शराब पार्टी में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह के चीफ केमिस्ट गोवर्धन सिदार सहित कुछ अन्य अधिकारियों की मौजूदगी की चर्चा सामने आई है। बताया जा रहा है कि वीआईपी रेस्ट हाउस के किचन में रखे फ्रीजर में भी शराब की कई बोतलें रखी मिलीं। एवं वही कार्यरत एक युवक शराब की बोतल और गिलास लाता दिखाइस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी कुछ लोगों द्वारा बना लिया गया, जो अब सोशल मीडिया में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।


घटना की जानकारी मिलते ही उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने तत्काल छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी मर्यादित एम डी श्री कटियार एवं वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी ली और इसकी विस्तृत जांच कराने के साथ दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकारी परिसरों की गरिमा बनाए रखना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इस प्रकार की अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।


इस घटना के बाद प्रबंधन हरकत में आया और प्रारंभिक स्तर पर प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए कोरबा और मड़वा पावर प्लांट में पदस्थ दो मुख्य रसायनज्ञों के कार्यक्षेत्र में बदलाव करते हुए उनका तबादला कर दिया गया। हालांकि यह कार्रवाई सामने आते ही अब कई नए सवाल भी उठने लगे हैं।
तबादला आदेश को देखने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वरिष्ठ अधिकारी होने की वजह से उनके खिलाफ केवल स्थानांतरण की कार्रवाई की गई है, जबकि इस तरह की घटना में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अपेक्षित मानी जा रही थी।
गौरतलब है कि हाल ही में राखड़ डैम फटने की घटना ने भी छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी मर्यादित की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उस मामले में विभागीय जांच के दौरान अधीक्षण अभियंता का तबादला कर दिया गया था, जबकि एक अभियंता और एक कार्यपालन अभियंता को निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद भी विभागीय कार्रवाई के अलग-अलग मापदंडों को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी।
अब डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह के वीआईपी रेस्ट हाउस में सामने आए इस ताजा मामले के बाद यह सवाल और भी तेज हो गया है कि क्या विभाग में कार्रवाई के मानदंड पद और प्रभाव के आधार पर तय किए जाते हैं। क्या बड़े अधिकारियों के लिए तबादला ही पर्याप्त कार्रवाई माना जाता है, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों पर सीधे निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई कर दी जाती है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि यही घटना किसी छोटे कर्मचारी या निचले स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती तो संभवतः तत्काल निलंबन की कार्रवाई होती। ऐसे में विभागीय अनुशासन, जवाबदेही और कार्रवाई की समानता को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
यह घटना केवल एक शराब पार्टी का मामला नहीं रह गई है, बल्कि इसने सरकारी संस्थानों की कार्यसंस्कृति, प्रशासनिक जवाबदेही और विभागीय अनुशासन पर व्यापक बहस को जन्म दे दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी मर्यादित का प्रबंधन वास्तव में सख्त कार्रवाई करता है या यह मामला भी केवल तबादले तक ही सीमित रह जाता है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

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