श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की गणना का दूसरा चरण शुरू
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पुरी, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
अड़तालीस वर्षों बाद हो रही सूचीकरण प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का उपयोग, सुना वेश सहित बहुमूल्य आभूषणों का हो रहा दस्तावेजीकरण
पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों और धरोहरों की सूचीकरण और गणना प्रक्रिया का दूसरा चरण प्रारंभ हो गया है। यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से संचालित की जा रही है, जिसके तहत यह कार्य 11 अप्रैल तक जारी रहेगा और इसके बाद 13 अप्रैल तथा 16 से 18 अप्रैल के बीच अगले सत्र आयोजित किए जाएंगे।

जानकारी के अनुसार सेवकों, रत्न विशेषज्ञों और सुनारों की एक चयनित टीम ने रत्न भंडार समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ तथा श्रीमंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक डॉ अरविंद पाढ़ी की उपस्थिति में पूर्वाह्न लगभग 11 बजकर 30 मिनट पर रत्न भंडार में प्रवेश किया और सूचीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ की।

गौरतलब है कि मंदिर में देवी देवताओं के दैनिक उपयोग में आने वाले आभूषणों की सूची तैयार करने का कार्य लगभग अड़तालीस वर्षों बाद शुरू किया गया है। इस प्रक्रिया का पहला चरण 25 मार्च से प्रारंभ हुआ था, जिसमें पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और उड़ी मानचित्रण के माध्यम से रिकॉर्डिंग की गई। साथ ही आभूषणों की डिजिटल सूची तैयार कर उन्हें धातु के आधार पर अलग अलग संदूकों में सुरक्षित रखा गया।

वर्तमान चरण में बाहरी रत्न भंडार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां त्योहारों और विशेष अवसरों पर उपयोग किए जाने वाले आभूषण सुरक्षित रखे जाते हैं। इनमें रथ यात्रा सहित अन्य धार्मिक अवसरों पर भगवान के अलंकरण में प्रयुक्त प्रसिद्ध सुना वेश यानी स्वर्ण आभूषण भी शामिल हैं।
वर्ष 1978 में तैयार सूची के अनुसार रत्न भंडार में कुल 111 वस्तुएं दर्ज हैं, जिनमें 78 सोने और 33 चांदी से संबंधित आभूषण बताए जाते हैं। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान श्रीमंदिर के दैनिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे। हालांकि सुरक्षा कारणों से श्रद्धालुओं को केवल बाहरी बैरिकेड से ही दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
गणना के दौरान गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा, लेकिन बाहरी गर्भगृह से दर्शन की व्यवस्था यथावत बनी रहेगी। मंदिर प्रशासन ने पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया है ताकि हर चरण का सही दस्तावेजीकरण किया जा सके। प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद संबंधित हिस्सों के पुनःस्थापन का कार्य भी किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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