लॉटरी से बनी कुर्सी पर लगी मुहर: बैकुंठपुर नगर पालिका अध्यक्ष पद पर नविता शिवहरे की जीत को उच्च न्यायालय की अंतिम मंजूरी
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कोरिया, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
तीन वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप, अपील खारिज होने के बाद नविता शिवहरे की अध्यक्ष पद पर जीत बरकरार
कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर पिछले तीन वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है। उच्च न्यायालय ने मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को निरस्त कर दिया है, जिससे नगर पालिका अध्यक्ष नविता शिवहरे की जीत पर अंतिम मुहर लग गई है।
नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेश शिवहरे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर का आम चुनाव दिसंबर 2021 में संपन्न हुआ था। इसके बाद एक जनवरी 2022 को चुनाव अधिकारी के निर्देशन में अध्यक्ष पद का चुनाव कराया गया। इस चुनाव में दोनों प्रत्याशियों को समान मत प्राप्त हुए थे, जिसके बाद सभी पार्षदों और दोनों प्रत्याशियों की सहमति से लॉटरी के माध्यम से निर्णय लिया गया और नविता शैलेश शिवहरे को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।

बताया गया कि पूरी प्रक्रिया में सहमति देने और हस्ताक्षर करने के बाद पराजित प्रत्याशी साधना जायसवाल ने जिला न्यायालय बैकुंठपुर में चुनाव याचिका दायर की थी। लगभग तीन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मतपेटियों का निरीक्षण, दोनों पक्षों के साक्ष्यों की जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद सात मई 2025 को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने साधना जायसवाल की चुनाव याचिका को खारिज कर दिया था।
जिला न्यायालय के इस आदेश के विरुद्ध साधना जायसवाल ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ में अपील प्रस्तुत की थी। इस मामले में दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने 23 फरवरी 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में दस अप्रैल 2026 को सुनाए गए निर्णय में उच्च न्यायालय ने जिला न्यायालय के फैसले को यथावत रखते हुए अपील को निरस्त कर दिया।

नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेश शिवहरे ने न्यायालय के इस निर्णय को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि इससे आमजन में न्यायपालिका की निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि सत्य और धर्म की जीत होती है और यह निर्णय उसी का प्रमाण है।
इस पूरे प्रकरण में वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष गुप्ता तथा उच्च न्यायालय बिलासपुर में अधिवक्ता चंद्रेश श्रीवास्तव और शशांक गुप्ता ने प्रभावी पैरवी की। निर्णय के बाद शैलेश शिवहरे ने सभी अधिवक्ताओं और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रदीप मिश्रा
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