“एलपीजी संकट का समाधान-“सौर ऊर्जा अपनाओ, आत्मनिर्भर भारत बनाओ”
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नई दिल्ली
By ACGN 7647 9817119303 948009
भारत में ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता, महंगे ईंधन और वैश्विक परिस्थितियों के कारण आज वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। रसोई गैस के दामों में उतार-चढ़ाव और विदेशों से ईंधन पर निर्भरता ने आम नागरिक की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में प्रकृति द्वारा प्रदत्त सौर ऊर्जा एक ऐसा वरदान है जो न केवल स्वच्छ और सुलभ है, बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इन्हीं विचारों को केंद्र में रखते हुए नई दिल्ली की प्रसिद्ध कवयित्री मंजुला श्रीवास्तव ने अपनी कविता के माध्यम से समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया है कि यदि हम सौर ऊर्जा को अपनाएं तो न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि देश की आर्थिक और ऊर्जा स्वतंत्रता भी मजबूत होगी। उनकी यह कविता ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और देशभक्ति की भावना को एक साथ जोड़ती है।
LPG सिलेंडर, सौर ऊर्जा और देशभक्ति
हर तरफ मचा है LPG सिलेंडर का हाहाकार,
सौर ऊर्जा देगी राहत अपार।
न केवल करेगी घर को रोशन,
पर रखती है घर में जल पहुँचाने का दम।
साथ ही बनेगी हमारे वाहन और चूल्हे का भी ईंधन।
विज्ञान युग में भी क्यों पिछड़े हुए हैं हम?
सौर पैनल का प्रयोग क्यों नहीं कर रहे हम?
युद्ध होते थे – होते रहेंगे,
आपदाएँ आती थीं – आती रहेंगी।
वैश्विक राजनीति बदलती थी – बदलती रहेगी,
क्यों किसी देश पर निर्भर रहेंगे हम?
सौर पैनल का प्रयोग क्यों नहीं कर रहे हम?
देश हमारा सौर ऊर्जा के वरदान से है भरा,
फिर भी हम मुँह ताकें किसी और देश का।
कैसा है यह हमारा करम?
स्वस्थ पर्यावरण वाला आत्मनिर्भर देश हमारा हो,
देशभक्ति की नई दिशा तय हो,
ईंधन का आयात हो न्यूनतम।
हर घर की छत पर हों सौर ऊर्जा के पैनल,
हर घर की छत पर हों सौर ऊर्जा के पैनल।
कवियित्री— मंजुला श्रीवास्तव
नई दिल्ली
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