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नक्सल प्रभावित जिलों में आजीविका बढ़ाने पर राज्यस्तरीय कार्यशाला, मुख्य सचिव विकास शील ने दिए समावेशी विकास के निर्देश

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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009


एलडब्ल्यूई प्रभावित आठ जिलों में परिवारों की आय तीस हजार रुपये प्रतिमाह तक बढ़ाने का लक्ष्य, क्लस्टर आधारित मॉडल पर होगा काम

रायपुर, राज्य में नक्सलवाद से मुक्त हो रहे क्षेत्रों में तीव्र, स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रायपुर में मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में नक्सल प्रभावित जिलों के आजीविका संवर्धन के लिए राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में इन क्षेत्रों के विकास को गति देने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए व्यापक रणनीति पर विचार विमर्श किया गया।


बैठक में अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव कृषि सहला निगार, प्रमुख सचिव सोनमणि वोरा, सचिव भीम सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गृह एवं जेल विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग और ग्रामोद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक अनीश कुमार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए तैयार समन्वित नीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी।


मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि जैसे जैसे छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होता जा रहा है वैसे वैसे राज्य की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। जिन क्षेत्रों में अब तक विकास नहीं पहुंच सका वहां सतत और समावेशी विकास को प्राथमिकता के साथ लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार सभी विभागों को समन्वित दृष्टिकोण के साथ अगले तीन वर्षों की कार्ययोजना बनाकर कार्य करना होगा और स्थानीय संसाधनों के आधार पर आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा।


कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। जिला स्तर के अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में क्लस्टर आधारित और विकासखंड केंद्रित आजीविका मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई जिसमें कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प और सूक्ष्म उद्यमों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत विभिन्न विभागों की योजनाओं को एकीकृत कर बेहतर समन्वय के साथ लागू किया जाएगा।
बैठक में जिला, विकासखंड और क्लस्टर स्तर पर त्रिस्तरीय योजना निर्माण और क्रियान्वयन की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर साठ दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए जिसमें सर्वेक्षण, योजना निर्माण और क्रियान्वयन की पूरी रूपरेखा शामिल होगी।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि उत्पादन से लेकर विपणन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा ताकि उत्पादकों को बेहतर मूल्य मिल सके और उनकी आय में वृद्धि हो। युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।
बैठक में बताया गया कि वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने के लिए परिवारों की आय बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय आर्थिक अनुप्रयुक्त अनुसंधान परिषद के सर्वेक्षण के अनुसार इन क्षेत्रों के पचासी प्रतिशत परिवारों की मासिक आय पंद्रह हजार रुपये से कम है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अगले ढाई से तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम तीस हजार रुपये प्रतिमाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
प्रमुख सचिव निहारिका बारीक ने बताया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विविधीकरण, सामूहिकीकरण, प्रौद्योगिकी और संतृप्ति के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति तैयार की गई है। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को कम से कम तीन आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा और प्रत्येक जिले में चार प्रमुख आजीविका क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से क्लस्टर आधारित और बाजार उन्मुख व्यवस्था विकसित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।


प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

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