सरकार ने विधायकों और मंत्रियों के वेतन वृद्धि से जुड़े चारों विधेयक वापस लेने की प्रक्रिया शुरू, सरकार का बड़ा यू टर्न
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भुवनेश्वर, ओड़िशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
जन आक्रोश के बाद ओड़िशा सरकार ने विधायकों और मंत्रियों के वेतन बढ़ोतरी प्रस्ताव पर लिया पुनर्विचार
भुवनेश्वर, ओड़िशा में विधायकों, मंत्रियों और शीर्ष पदाधिकारियों के वेतन में भारी बढ़ोतरी से जुड़े चारों विधेयकों को लेकर उठे व्यापक जन आक्रोश के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए इन विधेयकों को वापस लेने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। गुरुवार को ओड़िशा विधानसभा सचिवालय ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि संसदीय कार्य मंत्री डॉ मुकेश महालिंग ने चारों संशोधन विधेयकों को वापस लेने के लिए अनुमति मांगने का नोटिस दिया है। विधानसभा की मंजूरी मिलने के बाद इन विधेयकों की वापसी प्रभावी हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि ये सभी विधेयक नौ दिसंबर दो हजार पच्चीस को ओड़िशा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। इन विधेयकों में विधायकों के वेतन, भत्ते और पेंशन में लगभग तीन गुना वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव के अनुसार विधायक का मासिक वेतन लगभग एक लाख ग्यारह हजार रुपये से बढ़ाकर तीन लाख पैंतालीस हजार रुपये किया जाना था। इसी प्रकार मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का वेतन अट्ठानवे हजार रुपये से बढ़ाकर तीन लाख चौहत्तर हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके अलावा मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन तथा भत्तों में भी इसी तरह भारी बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया था।

इन विधेयकों में पूर्व विधायकों की पेंशन को भी तीस हजार रुपये से बढ़ाकर अस्सी हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव शामिल था। हालांकि इस निर्णय के बाद नागरिक समाज, सामाजिक संगठनों और आम जनता ने इसका तीखा विरोध किया। लोगों का कहना था कि बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक चुनौतियों के दौर में जनप्रतिनिधियों के वेतन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी करना संवेदनहीन कदम है।
विरोध बढ़ने के साथ ही सत्तारूढ़ दल के कई विधायकों ने भी मुख्यमंत्री से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। बीजू जनता दल जिसने प्रारंभ में इन विधेयकों का समर्थन किया था, उसने भी बाद में अपना रुख बदलते हुए निर्णय पर पुनर्विचार की मांग उठाई। विपक्ष के नेता नबीन पटनायक ने बढ़े हुए वेतन को लेने से इनकार करते हुए कहा कि यदि यह लागू होता है तो वह इस राशि को गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित करेंगे। वहीं कांग्रेस नेताओं ने भी इस फैसले की समीक्षा की मांग की।
बताया गया कि वेतन वृद्धि से जुड़े विधेयक विधानसभा से पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे गए थे, लेकिन राज्यपाल ने अब तक इस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच सरकार ने अंततः इन विधेयकों को वापस लेने का निर्णय लिया है।
प्रदीप मिश्रा
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