चांदनी बिहारपुर रेंज के जंगल में भीषण आग, हजारों एकड़ वन क्षेत्र जलकर खाक
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता सौरभ साहू
करोड़ों की वन संपदा और असंख्य वन्यजीवों का नुकसान, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
सूरजपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्र ओडगी विकासखंड अंतर्गत चांदनी बिहारपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत बसनारा के जंगलों में लगी भीषण आग ने पर्यावरण और वन्यजीवन को गहरा आघात पहुंचाया है। आग की लपटों ने हजारों एकड़ वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे करोड़ों रुपये की बेशकीमती वन संपदा राख में तब्दील हो गई। इस भयावह आग में असंख्य छोटे-बड़े वन्यजीव, पक्षी और कीट-पतंगे भी झुलसकर अपनी जान गंवा बैठे। जंगलों में भड़की आग के कारण वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास छोड़कर ग्रामीण इलाकों की ओर भटकने लगे हैं, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार जंगल में आग कई दिनों से लगातार फैलती जा रही है, लेकिन वन विभाग की ओर से समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब आग की सूचना देने के लिए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कई बार फोन तक नहीं उठाए गए। इस लापरवाही के कारण आग धीरे-धीरे फैलकर बड़े क्षेत्र में फैल गई और देखते ही देखते हजारों एकड़ जंगल जलकर खाक हो गया।

सरकार एक ओर जंगलों के संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए करोड़ों रुपये के बजट और योजनाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर वन विभाग की सुस्ती और लापरवाही गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन परिक्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी अक्सर मुख्यालय में मौजूद नहीं रहते और न ही नियमित गश्त की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। जब किसी गांव के जंगल में आग लगती है तो सूचना देने के बावजूद तत्काल कोई राहत या नियंत्रण दल मौके पर नहीं पहुंचता, जिससे आग विकराल रूप ले लेती है।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं हर वर्ष सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद रोकथाम के लिए ठोस और प्रभावी इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। कई बार जंगलों में छोटी-सी चिंगारी भीषण आग में बदल जाती है और उसका खामियाजा पूरे वन क्षेत्र और वन्यजीवों को भुगतना पड़ता है। बसनारा क्षेत्र के जंगलों में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां प्रारंभिक स्तर पर आग को नियंत्रित करने की व्यवस्था नहीं होने से वह तेजी से फैलती चली गई।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार जंगल में आग लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कई बार जंगलों में आने-जाने वाले लोग लापरवाही से बीड़ी या सिगरेट जलाकर फेंक देते हैं, जिससे सूखी पत्तियों और घास में आग लग जाती है। वहीं कुछ मामलों में जानबूझकर भी जंगलों में आग लगाने की घटनाएं सामने आती हैं। शाम के समय जब तेज हवा चलती है तो छोटी सी आग भी कुछ ही घंटों में बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेती है। यदि समय रहते निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था न हो तो नुकसान कई गुना बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में रात के समय निगरानी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। यदि वन विभाग की ओर से नियमित गश्त, फायर लाइन और आग बुझाने के आधुनिक संसाधनों की व्यवस्था की जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में कई वन कर्मचारी सीमित संसाधनों के साथ काम करने को मजबूर हैं। कहीं पैदल गश्त करनी पड़ती है तो कहीं जर्जर वाहनों के सहारे जंगलों की निगरानी की जाती है।

वन विभाग पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि कई बार उपलब्ध संसाधनों और बजट का सही उपयोग नहीं हो पाता। जंगलों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसके परिणाम उतने प्रभावी दिखाई नहीं देते। यदि आग बुझाने के उपकरण, त्वरित प्रतिक्रिया दल और तकनीकी निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाए तो इस तरह की घटनाओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
इस भीषण आग से न केवल वन संपदा का नुकसान हुआ है बल्कि पर्यावरण संतुलन पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका है। जंगलों में रहने वाले असंख्य जीव-जंतु, पक्षी और छोटे जीव इस आग में झुलसकर खत्म हो गए। इससे जैव विविधता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आग से मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है और कई बार लंबे समय तक उस क्षेत्र में वनस्पति का पुनर्विकास धीमा हो जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर इतनी बड़ी आग लगने के बावजूद समय पर नियंत्रण क्यों नहीं किया जा सका। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जंगल और पर्यावरण दोनों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए यह आवश्यक है कि वन विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करे, नियमित गश्त बढ़ाए और जंगलों में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और संसाधनों का उपयोग करे। इसके साथ ही ग्रामीणों को भी जागरूक करना जरूरी है ताकि वे जंगलों में आग से संबंधित किसी भी घटना की तुरंत सूचना दें और खुद भी ऐसी गतिविधियों से बचें जो आग का कारण बन सकती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वन विभाग इस भीषण आग की घटना से सबक लेकर ठोस कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा। जंगल और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए समय रहते प्रभावी और जिम्मेदार कार्रवाई की आवश्यकता है, अन्यथा आने वाले समय में प्रकृति और वन्यजीवन के लिए खतरा और बढ़ सकता है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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