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निगम का 915 करोड़ का बजट निराशाजनक और जनविरोधी, जयसिंह अग्रवाल

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


पूर्व मंत्री ने कहा पुराने वादों की कॉपी-पेस्ट, शहर की मूल समस्याओं पर कोई ठोस योजना नहीं

कोरबा। नगर निगम कोरबा द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत लगभग 915 करोड़ रुपये के बजट पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे निराशाजनक और जनविरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट शहर के वास्तविक विकास की दिशा नहीं दिखाता और आम जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं करता।
पूर्व मंत्री ने कहा कि पिछले बजट में किए गए अधिकांश वादे आज तक धरातल पर नहीं उतर पाए हैं। गरीब और वंचित वर्ग के लिए वार्ड स्तर पर अंतिम संस्कार हेतु लकड़ी उपलब्ध कराने की घोषणा कागजों तक सीमित रह गई है, वहीं छात्राओं के लिए मुफ्त बस सेवा का वादा भी अब तक अधूरा है।
उन्होंने कहा कि शहर के 67 वार्डों में पेयजल आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट की स्थिति बदहाल है, जिससे आम नागरिकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। इसके विपरीत निगम प्रशासन उन योजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है जो नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आतीं, जैसे किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी, महतारी वंदन योजना के तहत मासिक सहायता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रामलला दर्शन योजना। उन्होंने इसे जनता को गुमराह करने का प्रयास बताया।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम को शहर के विकास से जुड़े कार्यों जैसे उद्यान, गार्डन, सामुदायिक भवन और स्थानीय व्यापारिक सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन इन विषयों को बजट में नजरअंदाज कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में विकसित परिसंपत्तियों को निजी एजेंसियों को लीज पर देकर उनका व्यावसायीकरण किया जा रहा है, जिससे जनता की बजाय निजी कंपनियों को लाभ पहुंच रहा है।
उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब अधिकांश कार्य आउटसोर्स एजेंसियों को सौंपे जा रहे हैं तो निगम के संसाधनों और कर्मचारियों की उपयोगिता पर प्रश्न खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि बुधवारी बाजार को भी निजी हाथों में देने का प्रयास किया गया था, जिससे छोटे सब्जी विक्रेताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता। कांग्रेस के विरोध के बाद यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।
पूर्व मंत्री ने अंत में कहा कि यह बजट केवल दिखावे और आत्मप्रशंसा का दस्तावेज है, जिसमें जनता के हितों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ऐसी जनविरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध करती रहेगी और जनता की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी।

प्रदीप मिश्रा
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