भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिलेगा आर्थिक संबल, मुख्यमंत्री देंगे पाँच लाख परिवारों को पाँच सौ करोड़ की सहायता
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत सीधे खातों में पहुँचेगी सहायता राशि, रायपुर जिले के सबसे अधिक 53 हजार 338 मजदूर परिवार होंगे लाभान्वित
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 25 मार्च को बलौदाबाजार से लगभग पाँच लाख भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को लगभग पाँच सौ करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान करेंगे। यह राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में अंतरित की जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का संबल मिलेगा।
राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन कृषि श्रमिक परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के अंतर्गत चार लाख पंचानवे हजार से अधिक पात्र परिवारों के लिए चार सौ पंचानवे करोड़ छियानवे लाख पचास हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक पात्र भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार को प्रतिवर्ष दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके खाते में दी जाती है।
इस योजना के तहत सबसे अधिक लाभ रायपुर जिले के तिरपन हजार तीन सौ अड़तीस भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को मिलेगा। इसके अलावा बिलासपुर जिले के उनतालीस हजार चार सौ एक तथा महासमुंद जिले के सैंतीस हजार ग्यारह भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी योजना का लाभ प्राप्त होगा, जिनका सत्यापन पूरा हो चुका है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि इस योजना को प्रारंभ करने का उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि इस योजना में केवल खेतिहर मजदूर ही नहीं बल्कि वनोपज संग्राहक भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी तथा पारंपरिक पौनी पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवारों को भी शामिल किया गया है। अनुसूचित क्षेत्रों में देवस्थलों में पूजा करने वाले पुजारी, बैगा, गुनिया और माँझी परिवारों को भी इस योजना में शामिल कर राज्य की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े परिवारों को सम्मान देने का प्रयास किया गया है।
लाभार्थियों की सूची में बाइस हजार अट्ठाईस बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं जो राज्य की पारंपरिक संस्कृति और आस्था के संरक्षक माने जाते हैं। सरकार का उद्देश्य इन परिवारों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर उनकी बुनियादी आवश्यकताओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग देना है, ताकि उन्हें किसी प्रकार के कर्ज का सहारा न लेना पड़े।
राज्य सरकार ने पूर्व में दी जाने वाली सात हजार रुपये की सहायता राशि को बढ़ाकर अब दस हजार रुपये प्रतिवर्ष कर दिया है। यह सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और जरूरतमंद परिवारों को समय पर लाभ मिल पाता है। सरकार का मानना है कि जब नीति स्पष्ट और नीयत मजबूत हो तो विकास की किरण समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है और यही अंत्योदय की सच्ची भावना है।
प्रदीप मिश्रा
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