मड़ई की जमीन, सेखवा का NOC और फाइल से गायब दस्तावेज… मरवाही SDM कार्यालय में डाइवर्सन का खेल?
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गौरेला–पेंड्रा–मरवाही, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
नकल मांगते ही खुली परतें- फाइल में NOC ही नहीं, फिर किस आधार पर जारी हुआ जमीन का डाइवर्सन आदेश
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के मरवाही अनुभाग में जमीन डाइवर्सन से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तहसील सकोला अंतर्गत ग्राम पंचायत मड़ई की भूमि खसरा नंबर 236/7, रकबा 2.023 हेक्टेयर से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसका वर्ष 2022 में संदिग्ध परिस्थितियों में डाइवर्सन कराया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में बेबीलता, पति शंकर प्रसाद प्रजापति के नाम दर्ज बताई जा रही है। लेकिन पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब जमीन ग्राम पंचायत मड़ई की सीमा में स्थित है, तो डाइवर्सन प्रक्रिया में ग्राम पंचायत सेखवा का उल्लेख क्यों किया गया।

नियमों के अनुसार किसी भी भूमि के डाइवर्सन के लिए संबंधित ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) अनिवार्य होता है। लेकिन जब एसडीएम कार्यालय की नकल शाखा से संबंधित फाइल की प्रमाणित प्रति मांगी गई, तो लिखित जवाब में यह स्पष्ट किया गया कि डाइवर्सन प्रकरण की फाइल में किसी भी पंचायत का NOC संलग्न नहीं है।

यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। सवाल यह उठने लगा कि जब फाइल में अनापत्ति प्रमाणपत्र मौजूद ही नहीं है, तो आखिर डाइवर्सन आदेश किस आधार पर जारी किया गया।
इतना ही नहीं, जानकारी के अनुसार भूमि ग्राम पंचायत मड़ई में स्थित है, लेकिन तत्कालीन मरवाही एसडीएम के आदेश में उद्घोषणा प्रकाशन ग्राम पंचायत सेखवा में कराया जाना दर्शाया गया है। यह तथ्य न केवल विरोधाभासी है बल्कि पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध भी बनाता है।

ग्राम पंचायत मड़ई के सरपंच के अनुसार संबंधित भूमि पहले से विवादित रही है और इसी कारण पंचायत से NOC मिलना संभव नहीं था। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि सुनियोजित तरीके से जमीन को दूसरी पंचायत का दर्शाकर डाइवर्सन की प्रक्रिया पूरी कराई गई।

मामले में यह भी चर्चा है कि संबंधित भूमि की भू-स्वामी बेबीलता प्रजापति के पति शंकर प्रजापति पेशे से शिक्षक हैं और जिले में भूमि से जुड़े विवादों को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना विभागीय सहयोग के इस तरह का डाइवर्सन संभव ही नहीं है।
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तो राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और फाइलों के भीतर छिपी सच्चाई सामने आ सकती है।
पूरा मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन चुका है और लोग प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। क्योंकि यह सिर्फ एक जमीन का मामला नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही और पारदर्शिता की भी परीक्षा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—जब फाइल में NOC ही मौजूद नहीं है, तो मरवाही SDM कार्यालय से जमीन का डाइवर्सन आदेश आखिर किस आधार पर जारी हुआ?
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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