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गौरैया के संरक्षण को लेकर बढ़ी चिंता, जागरूकता और ठोस कदमों की उठी मांग

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नियाली, ओडिशा

By ACGN 7647981711, 9303948009

ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज

तेजी से घटती संख्या ने बढ़ाई पर्यावरण प्रेमियों की चिंता, लोगों से घोंसले और दाना-पानी की व्यवस्था करने की अपील

नियाली 23 मार्च 2026 को ओडिशा के नियाली क्षेत्र में तेजी से घटती गौरैया की संख्या को लेकर लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ती जा रही है। कभी गांवों और शहरों में आसानी से दिखाई देने वाली यह छोटी चिड़िया अब दुर्लभ होती जा रही है और इसके संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो लक्ष्मी स्वरूपा मानी जाने वाली यह छोटी चिड़िया विलुप्ति के कगार पर पहुंच सकती है। पहले जहां प्रदेश के अधिकांश गांवों और बस्तियों में गौरैया की चहचहाहट आम बात थी, वहीं अब इसका दिखना भी दुर्लभ होता जा रहा है।


स्थानीय स्तर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में वक्ताओं ने बताया कि गौरैया के घटते अस्तित्व के पीछे तेजी से बढ़ता शहरीकरण, पेड़ों की कटाई और पारंपरिक आवासों का खत्म होना प्रमुख कारण है। पुराने कच्चे मकानों और छप्परनुमा घरों के समाप्त होने से गौरैया के प्राकृतिक घोंसले भी खत्म हो गए हैं। गांवों में बीज और दाने की कमी तथा मोबाइल टावरों से निकलने वाले विकिरण को भी इसके घटते अस्तित्व का एक कारण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि लोग अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में गौरैया के लिए सुरक्षित घोंसले बनाएं, दाना और पानी की व्यवस्था करें तथा पर्यावरण को पक्षियों के अनुकूल बनाने के लिए पहल करें। साथ ही स्कूलों और पंचायत स्तर पर विशेष अभियान चलाकर बच्चों और ग्रामीणों को गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक बताया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि केवल जागरूकता ही नहीं बल्कि एक ठोस कार्ययोजना बनाकर उसके प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है, ताकि गौरैया की संख्या में फिर से वृद्धि हो सके और इस महत्वपूर्ण पक्षी प्रजाति को विलुप्त होने से बचाया जा सके। इसके लिए ओडिशा सरकार के साथ-साथ आम जनसहभागिता को भी बेहद जरूरी बताया गया।

प्रदीप मिश्रा
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