लकड़बग्घे की तड़पकर मौत से वन प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल, जंगल कटे तो गांवों में भटक रहे जंगली जानवर
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता सौरभ साहू
जंगल उजड़ रहे, वन्यजीव मर रहे और विभाग मौन—सूरजपुर के जंगलों पर किसकी नजर?
सूरजपुर 23 मार्च 2026 को जिले के चांदनी–ओडगी क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा कटाक्ष खड़ा कर दिया है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई, लगातार लग रही आग और कथित लकड़ी तस्करी के बीच वन्यजीवों का प्राकृतिक घर उजड़ता जा रहा है। परिणाम यह है कि जंगली जानवर अब जंगल छोड़कर रिहायशी इलाकों में भटकने को मजबूर हो रहे हैं। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत कोल्हुआ मकराद्वारी के पास एक लकड़बग्घा गंभीर हालत में गांव के आसपास घूमता रहा और अंततः तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई।

ग्रामीणों के अनुसार सुबह से ही लकड़बग्घा असामान्य हालत में गांव के आसपास भटक रहा था। वह कभी पत्थर काटने की कोशिश करता तो कभी लकड़ी को दांतों से चबाने लगता। उसकी हालत देखकर ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी, लेकिन आरोप है कि विभाग की प्रतिक्रिया इतनी धीमी रही कि जब तक टीम मौके पर पहुंची, तब तक वह बेजुबान जानवर दम तोड़ चुका था। जंगलों की रक्षा और वन्यजीवों की सुरक्षा का जिम्मा जिस विभाग पर है, उसी विभाग की निष्क्रियता अब खुलेआम चर्चा का विषय बनती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चांदनी क्षेत्र में लंबे समय से जंगलों के आसपास सैकड़ों ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं और जंगलों से लकड़ी की अवैध कटाई लगातार जारी है। गुरु घासीदास क्षेत्र से लकड़ी तस्करी कर पड़ोसी राज्यों तक पहुंचाने की चर्चाएं भी आम हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा है। जंगलों में लगने वाली आग से पेड़-पौधे ही नहीं बल्कि छोटे जीव-जंतु, पक्षी और वन्यजीव भी बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। धुएं और जहरीली गैसों के कारण जानवरों का दम घुटता है और भोजन-पानी की तलाश में वे गांवों की ओर निकल पड़ते हैं।
जंगलों के उजड़ने का असर अब सीधे ग्रामीणों की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में आने से गांवों में दहशत का माहौल है। लोग अपने पशुधन और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी न तो मौके पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और न ही इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई सामने आ रही है।
मामले को लेकर जब पत्रकारों ने वन विभाग के अधिकारियों और रेंजर से संपर्क करने की कोशिश की तो फोन तक रिसीव नहीं किया गया। यह रवैया खुद विभाग की संवेदनहीनता और जवाबदेही से दूरी को दर्शाता है। जंगलों की कटाई, तस्करी और आगजनी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन कार्रवाई का अभाव विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब सवाल यह है कि जब जंगल उजड़ रहे हैं, वन्यजीव मर रहे हैं और ग्रामीण डर के साये में जी रहे हैं, तो आखिर सूरजपुर के जंगलों की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग कब जागेगा?
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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