एनटीपीसी पर फिर भड़का जनाक्रोश मुआवजा और रोजगार को लेकर ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन रोका डैम का काम
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
मुआवजा और रोजगार के अधूरे वादों पर फिर भड़के ग्रामीण, राखड परिवहन रोककर किया प्रदर्शन, प्रशासन और एनटीपीसी अधिकारियों से हुई लंबी चर्चा
कोरबा ACGN:- कोरबा जिले में एनटीपीसी राखड़ डैम से प्रभावित गांवों में एक बार फिर आक्रोश खुलकर सामने आया। ग्राम पंचायत धनरास के अंतर्गत धनरास, छुरीखुर्द, घमोटा और सालियाभाटा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने 23 मार्च को मुआवजा, रोजगार और अन्य लंबित समस्याओं को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप राखड़ परिवहन करने वाले वाहनों को रोक दिया, ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से उनकी समस्याओं को लेकर एनटीपीसी प्रबंधन केवल आश्वासन देता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले उन्होंने अपनी मांगों को लेकर एनटीपीसी प्रबंधन को लिखित रूप से अवगत कराया था और अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी थी। पत्र में स्पष्ट रूप से राखड़ डस्ट से प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति राशि देने, ग्राम घमोटा के पास सीपेज वाटर पंप में स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने और वित्तीय वर्ष 2024-25 की सीपेज राशि किसानों को शीघ्र प्रदान करने की मांग रखी गई थी।


ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष 7 अप्रैल 2025 को भी इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन किया गया था, उस समय दर्री तहसील की तत्कालीन नायब तहसीलदार श्रीमती जानकी काठले की उपस्थिति में एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया था। उस दौरान एनटीपीसी की ओर से अधिकारी अतुल पाराशर और नवरंग जी उपस्थित थे और उन्होंने समस्याओं के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया था। उस आश्वासन पर भरोसा करते हुए ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया था, लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी वादे पूरी तरह पूरे नहीं हो पाए।

ग्रामीणों का कहना है कि इससे यह धारणा बनती जा रही है कि केवल प्रशासनिक अधिकारियों के चेहरे बदलते हैं, लेकिन आश्वासन और स्थिति दोनों पहले जैसी ही बनी रहती हैं।

इसी तारतम्य में फिर एक बार फिर ग्रामीणों का धैर्य टूट गया और उन्होंने सड़क पर उतरकर आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। तहसील प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार बजरंग चंद्रा मौके पर पहुंचे फिर धरना स्थल से ही एनटीपीसी के अधिकारियों को उन्होंने फोन लगाकर बुलाया काफी इंतजार के बाद एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से अधिकारी शशांक , अतुल पाराशर और नवरंग जी धरना स्थल पर पहुंचे, प्रशासनिक अधिकारी नया तहसीलदार द्वारा ग्रामीणों तथा एनटीपीसी अधिकारियों के बीच बातचीत शुरू कराई। एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से शशांक, अतुल पाराशर और नवरंग धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की।

ग्रामीणों ने एनटीपीसी पर आरोप लगाया कि एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है परंतु वह पूरा नहीं होता उनके द्वारा कहा गया कि पिछले वर्ष की क्षतिपूर्ति राशि जो की जनवरी से लेकर जून तक रखड़ उड़ने के कारण होने वाले नुकसान के क्षतिपूर्ति राशि दी जाती है जो केवल 10 दिन की राशि होती है जो पर्याप्त नहीं है पर वह राशि भी अभी तक कई लोगों को प्राप्त नहीं हुई है, जिस पर एनटीपीसी प्रबंधन ने कहा कि उक्त राशि राजस्व के खाते में डाल दी गई है शीघ्र ही वह मिल जाएगी

एनटीपीसी द्वारा बताया गया की 15 अप्रैल तक उक्त राशि ग्रामीणों को प्राप्त हो जाएगी, उसके पश्चात ग्रामीणों ने रोजगार एवं श्रमिकों के भुगतान को लेकर एनटीपीसी प्रबंधन से कहा कि यहां श्रमिकों को केंद्र सरकार द्वारा दिए गए दर पर भुगतान नहीं किया जाता एवं आश्वासन के बाद भी भूविस्थापितो और प्रभावित लोगों को रोजगार उपलब्ध नहीं हो पाता धरने के दौरान ग्रामीणों ने वर्ष 2006 में राखड़ डैम फटने की घटना का दर्द भी दोहराया। ग्रामीणों के अनुसार उस दुर्घटना में घमोटा गांव पूरी तरह प्रभावित हो गया था और कई परिवारों को दूसरी जगह बसाया गया था। उस समय प्रभावित परिवारों को रोजगार देने का वादा भी किया गया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग दो दशक बाद भी वह वादा अधूरा ही है। इस प्रकार रोजगार एवं मुआवजे को लेकर एनटीपीसी और ग्रामीणों के बीच बात नहीं बन पा रही थी ग्रामीणों का कहना था कि एनटीपीसी प्रबंधन हमेशा आश्वासन देता है समय मांगता है पर पूरा कुछ नहीं करता

इस दौरान धनरास के सरपंच लक्ष्मीकांत कंवर भी ग्रामीणों के साथ उपस्थित थे एनटीपीसी ने जब उनसे चर्चा करते हुए कहा कि सीख रही उनकी सभी मांगों पर प्रबंधन द्वारा कार्यवाही की जाएगी और मांगों को पूर्ण करने का प्रयास किया जाएगा अतः आंदोलन को समाप्त करने एवं ग्रामीणों को समझने के लिए कहा, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह ग्रामीणों के हित का मामला है और ग्रामीणों की इच्छा के बगैर में किसी भी प्रकार का फैसला उनके द्वारा नहीं लिया जा सकता उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीणों की मांगे पूरी नहीं होगी उनके द्वारा आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा

आंदोलन के दौरान मौके पर पुलिस प्रशासन की ओर से कटघोरा के एसडीओपी राजपूत और थाना प्रभारी धर्म नारायण तिवारी भी मौके पर मौजूद रहे और स्थिति को नियंत्रित करते हुए दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराया। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष हुए आंदोलन के दौरान भी थाना प्रभारी धर्म नारायण तिवारी मौके पर उपस्थित थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। और आज भी लंबी चर्चा और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद एनटीपीसी प्रबंधन ने 15 अप्रैल तक क्षतिपूर्ति राशि देने तथा 27 मार्च को तहसीलदार की उपस्थिति में रोजगार के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करने का आश्वासन दिया। प्रशासन के समझाने पर ग्रामीणों ने फिलहाल आंदोलन समाप्त कर दिया, लेकिन स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस बार भी आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रहा तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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