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सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर, इसे संजोना हम सबकी जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जशपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


सरहुल महोत्सव में मुख्यमंत्री ने धरती माता, सूर्य देव और साल वृक्ष की पूजा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की

जशपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित पारंपरिक सरहुल महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धरती माता, सूर्य देव और साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और समृद्ध फसल की कामना की। पारंपरिक परंपरा के अनुसार पूजा कराने वाले बैगा ने मुख्यमंत्री के कान में सरई फूल खोंसकर उन्हें आशीर्वाद दिया।


मुख्यमंत्री ने जिलेवासियों को सरहुल उत्सव और हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरहुल महोत्सव प्रकृति, धरती और जीवन के संतुलन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बैगा, पाहन और पुजारी द्वारा की जाने वाली पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति है। यह पर्व जनजातीय समाज की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसे सहेजकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की जनता से किए गए वादों को तेजी से पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 25 किश्तों में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में दी जा चुकी है, जिससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य देने के लिए 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। साथ ही विधानसभा में प्रस्तुत धर्म स्वातंत्र्य विधेयक सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा।


सरहुल पर्व चैत्र माह में मनाया जाने वाला उरांव समाज का प्रमुख उत्सव है, जो प्रकृति के नवजीवन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व में धरती माता और सूर्य देव के प्रतीकात्मक विवाह के साथ सामूहिक पूजा की जाती है। सरना स्थल पर पूजा-अर्चना, प्रसाद वितरण और लोकनृत्य-गीतों के माध्यम से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी सौ से अधिक महिलाओं और युवतियों की टोली ने मनमोहक सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। मांदर की गूंजती थाप और उत्साह से भरे वातावरण ने पूरे परिसर को जनजातीय संस्कृति के रंग में रंग दिया, जहां बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति से उत्सव का उल्लास चरम पर रहा।
इस अवसर पर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट, विधायक गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

प्रदीप मिश्रा
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