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बस्तर की बिहान दीदियां तैयार कर रहीं कुदरती हर्बल गुलाल

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रायपुर – छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


पलाश, पालक और चुकंदर से बन रहे रंग, होली में मिलेगा सुरक्षित और इको-फ्रेंडली विकल्प
रायपुर ACGN:- इस बार होली के रंग कुछ खास होने वाले हैं। बस्तर की बिहान दीदियां प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं, जो सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में यह सराहनीय पहल की गई है।
बस्तर जिले में बिहान से जुड़ी महिलाओं को सब्जियों और फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पलाश के फूलों से केसरिया रंग, पालक भाजी से हरा रंग और लाल भाजी से लाल रंग तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही गुलाब, गेंदा, पलाश की पंखुड़ियां, गुलाब जल और इत्र मिलाकर खुशबूदार और त्वचा के अनुकूल गुलाल बनाया जा रहा है। इस गुलाल में किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे यह आंख, त्वचा और बालों के लिए सुरक्षित है।


जिले के विभिन्न विकासखंडों के नौ स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया गया। यहां महिलाएं वैज्ञानिक तरीके से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर रंग बनाना सीख रही हैं। कॉर्न फ्लावर के बेस में चुकंदर और भाजी के अर्क को मिलाकर इको-फ्रेंडली गुलाल तैयार किया जा रहा है, जो पूरी तरह चर्म रोग मुक्त है।
प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने इस वर्ष 500 किलो से लेकर 1000 किलो तक हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके विक्रय के लिए भी खास योजना बनाई गई है। जगदलपुर शहर के प्रमुख स्थानों और शासकीय कार्यालयों में स्टॉल लगाए जाएंगे। साथ ही जनपद स्तर के बाजारों में भी इस देशी और शुद्ध गुलाल की बिक्री की जाएगी।
बिहान से जुड़ी महिलाओं के लिए यह पहल सिर्फ रंग बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का मजबूत जरिया बन रही है। इससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी और लोगों को सुरक्षित होली मनाने का बेहतर विकल्प भी मिलेगा।
इस बार बस्तर की होली रंगों के साथ सेहत और पर्यावरण की भी चिंता करेगी, और यह संभव हो रहा है बिहान दीदियों की मेहनत और नवाचार से।
प्रदीप मिश्रा
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