डिजिटल दुकान–देशी पहचान से महिलाओं को नई बाजार पहचान
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
सलिहाभाटा में 64 स्व सहायता समूह महिलाओं को मिला डिजिटल विपणन और ब्रांड निर्माण का प्रशिक्षण
कोरबा | ACGN:- महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कोरबा जिले में एक सराहनीय पहल की गई। “डिजिटल दुकान–देशी पहचान” परियोजना के अंतर्गत कोरबा विकासखंड के उरगा क्लस्टर स्थित सलिहाभाटा ग्राम पंचायत में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए डिजिटल विपणन एवं ब्रांड निर्माण विषय पर एक दिवसीय विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए उनके स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुँचाने के लिए सक्षम बनाना रहा।
यह प्रशिक्षण पिरामल फाउंडेशन की गांधी फेलो नीलू पटेल द्वारा महिला अनुकूल पंचायत की अवधारणा के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में शिखर युवा मंच संस्था से कृष्ण कुमार कौशिक का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण में 16 स्वयं सहायता समूहों की कुल 64 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे मनोयोग से डिजिटल माध्यमों के उपयोग की बारीकियों को समझा।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान महिलाओं को सरल और सहज भाषा में डिजिटल विपणन की मूल अवधारणा समझाई गई। उन्हें बताया गया कि अब बाजार केवल हाट-बाजार या स्थानीय दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से उत्पादों को दूर-दराज के ग्राहकों तक भी पहुँचाया जा सकता है। महिलाओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार से जुड़ने के तरीके, ग्राहकों से सीधे संपर्क स्थापित करने की रणनीति, उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी प्रस्तुति और पैकेजिंग का महत्व विस्तार से समझाया गया।

ब्रांड निर्माण के विषय में बताया गया कि किसी भी उत्पाद की पहचान उसके नाम, प्रतीक चिन्ह, पैकिंग और प्रचार से बनती है। यदि उत्पाद की सही पहचान बनाई जाए तो वह बाजार में अलग स्थान बना सकता है। महिलाओं को यह भी सिखाया गया कि सामाजिक माध्यमों जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक और अन्य डिजिटल मंचों के माध्यम से अपने उत्पादों का प्रचार कैसे किया जाए और बिक्री कैसे बढ़ाई जाए। प्रशिक्षण में व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से यह भी बताया गया कि ग्राहक का विश्वास जीतना और निरंतर संवाद बनाए रखना व्यापार की सफलता की कुंजी है।
नीलू पटेल ने बताया कि “डिजिटल दुकान–देशी पहचान” परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को डिजिटल मंच उपलब्ध कराना है, ताकि महिलाओं की आय में वृद्धि हो और वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने का एक प्रयास है। साथ ही यह सार्वजनिक तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पंचायत स्तर पर महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिल सके।
प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं ने इसे अत्यंत उपयोगी बताया और कहा कि अब वे अपने उत्पादों जैसे घरेलू खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प वस्तुएं और अन्य स्थानीय उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेचने का प्रयास करेंगी। प्रतिभागियों ने भविष्य में ऐसे और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि वे डिजिटल तकनीक का बेहतर उपयोग कर सकें।
यह पहल कोरबा जिले में महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम के रूप में देखी जा रही है। ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ने का यह प्रयास आने वाले समय में स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और व्यापक बाजार दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
प्रदीप मिश्रा
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