गेवरा खदान में भू-विस्थापितों का प्रदर्शन, पांच घंटे ठप रहा कोल उत्पादन, रोजगार और हेवी ब्लास्टिंग रोकने की मांग, दो दिन में समाधान का आश्वासन
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में हुआ आंदोलन
कोरबा ACGN :- एसईसीएल की गेवरा खदान से प्रभावित भू-विस्थापित किसानों ने रोजगार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन के दौरान गेवरा खदान में मिट्टी और कोयला खनन के साथ-साथ साइलो संचालन को करीब पांच घंटे तक बंद करा दिया गया, जिससे कोयला रैक लोडिंग का कार्य प्रभावित रहा। स्थिति को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और सीआईएसएफ के जवान तैनात किए गए थे।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि खदान विस्तार के नाम पर ग्रामीणों की पूरी जमीन ली जा रही है, लेकिन रोजगार देते समय प्रभावित परिवारों को उनका पूरा हक नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग के नाम पर प्रभावितों के रोजगार में कटौती कर बाहरी लोगों को काम दिया जा रहा है। विस्थापन के बाद प्रभावित परिवारों का जीवन स्तर सुधरने के बजाय और खराब हुआ है। छोटे किसानों को खेती से अलग कर दिया गया और अब वैकल्पिक रोजगार में भी अनदेखी की जा रही है, जिसे किसान सभा स्वीकार नहीं करेगी।
किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनियां प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता नहीं दे रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना सेफ्टी जोन बनाए खदान विस्तार का कार्य किया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। पहले सेफ्टी जोन बनाया जाए, उसके बाद ही विस्तार कार्य किया जाए।
भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेता दामोदर श्याम ने कहा कि खदान विस्तार में हो रही हेवी ब्लास्टिंग से गांवों में घरों की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं और लोगों में भय का माहौल है। खदान से उड़ने वाली धूल और डस्ट से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और घरों में रखा सामान भी खराब हो रहा है, लेकिन प्रबंधन इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
आंदोलनकारियों ने एसईसीएल प्रबंधन के सामने मांग रखी कि आउटसोर्सिंग से होने वाले सभी कार्यों में भू-विस्थापित परिवारों के बेरोजगारों को शत-प्रतिशत रोजगार दिया जाए, हेवी ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगे, खदान विस्तार से पहले सेफ्टी जोन के नियमों का पालन किया जाए और धूल-डस्ट से प्रभावित ग्रामीणों को क्षतिपूर्ति दी जाए।
करीब पांच घंटे तक खदान और साइलो बंद रहने के बाद एसईसीएल गेवरा प्रबंधन ने दो दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया। हालांकि आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि यदि तय समय में सकारात्मक समाधान नहीं हुआ तो फिर से खदान बंद कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष भू-विस्थापित और किसान नेता शामिल रहे।
प्रदीप मिश्रा
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