प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को डीजीपीएस सर्वे और वन्यजीव प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
बारनवापारा अभ्यारण्य में आधुनिक तकनीक, आईटी आधारित वन प्रबंधन और संरक्षण उपायों पर दिया गया प्रशिक्षण
रायपुर ACGN :- बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें डीजीपीएस सर्वे, आईटी आधारित वन प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों के उपयोग, क्षेत्रीय सर्वेक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की प्रक्रियाओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराया गया, जिससे वे भविष्य में जमीनी स्तर पर इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर सकें।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने प्रशिक्षु अखिल भारतीय वन सेवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग कर अपने कौशल का निरंतर विकास करें और छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा के संरक्षण और सुरक्षा के लिए सतत प्रयास करें। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव एवं क्षेत्रीय निदेशक स्तोविषा समझदार ने डीजीपीएस की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा वन सर्वेक्षण, सीमांकन और प्रबंधन में इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीजीपीएस आधारित सर्वेक्षण से सटीक और विश्वसनीय डेटा संग्रह संभव होता है, जो दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। इसी क्रम में उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक वरुण जैन ने गज संकेत मोबाइल एप्लिकेशन की जानकारी देते हुए बताया कि यह एप हाथी मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग, मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन और त्वरित सूचना साझा करने में एक प्रभावी डिजिटल टूल के रूप में कार्य करता है। प्रशिक्षु अधिकारियों को एप के फील्ड उपयोग, डेटा एंट्री और प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर वनमंडलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी और फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन सेवा अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल टूल्स और वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को जमीनी स्तर पर बेहतर निर्णय लेने में सहायक होते हैं।
इस अवसर पर बारनवापारा अभ्यारण्य के अधीक्षक कृषानू चन्द्राकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को अभ्यारण्य की भौगोलिक, पारिस्थितिक और संरक्षण से जुड़ी विशेषताओं की जानकारी दी। साथ ही अधिकारियों को वनभैंसा संरक्षण केंद्र, ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र, ग्रासलैंड विकास क्षेत्रों सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
प्रदीप मिश्रा
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