विधवा और दिव्यांग महिला को आज भी नहीं मिला प्रधानमंत्री आवास और पेंशन का लाभ
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रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
By ACGN 7647981711, 9303948009
30 वर्षों से लकवा ग्रस्त हिरमन सारथी झोपड़ी टूटने और पेंशन बंद होने के बाद भीख मांगकर जीवन यापन को मजबूर
धर्मजयगढ़ ACGN :- धर्मजयगढ़ नगर पंचायत क्षेत्र की रहने वाली विधवा और निशक्त महिला हिरमन सारथी की जिंदगी आज भी सरकारी योजनाओं की राह देख रही है। करीब 30 वर्ष पूर्व हिरमन सारथी को पक्षाघात यानी लकवा मार गया था, जिसके बाद वह पूरी तरह असहाय हो गई थीं। उस समय वह एक झोपड़ी में रहती थीं और बिस्तर से उठने में भी असमर्थ थीं। इस कठिन दौर में डॉ. खुर्शीद खान द्वारा प्रतिदिन झोपड़ी में जाकर निःशुल्क उपचार किया गया, जिसके परिणामस्वरूप हिरमन धीरे-धीरे लाठी के सहारे चलने-फिरने में सक्षम हुईं, लेकिन जीवन की मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
पूर्व पार्षद डॉ. शहजादी हुसैन के प्रयासों से हिरमन सारथी को निशक्त पेंशन स्वीकृत हुई थी, जिससे उन्हें कुछ राहत मिली थी, लेकिन उनके कार्यकाल के समाप्त होने के बाद पेंशन भी बंद हो गई। इसके बाद हालात और बदतर हो गए। हिरमन की झोपड़ी को तोड़ दिया गया और जिस जमीन पर वह वर्षों से रह रही थीं, उस पर भी कब्जा कर लिया गया। आज हिरमन के पास न तो रहने के लिए पक्का मकान है और न ही किसी प्रकार की नियमित पेंशन। मजबूरी में वह भीख मांगकर अपना जीवन निर्वाह कर रही हैं।
वर्तमान में समाज सेविका संजना अग्रवाल और सपना राना द्वारा यथासंभव हिरमन सारथी की सहायता की जा रही है, लेकिन यह मदद स्थायी समाधान नहीं है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह मामला पूरी तरह मानवीय संवेदना और शासन की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ा हुआ है। मुख्य नगर अधिकारी से मांग की जा रही है कि हिरमन सारथी को पुनः निशक्त पेंशन दिलाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का मकान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए, ताकि जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें सम्मानपूर्वक रहने का अधिकार मिल सके।
प्रदीप मिश्रा
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