नशामुक्ति का ढोल, महुआ का बोलबाला! स्कूलों के आस पास नशे का कारोबार, आखिर किसके भरोसे चल रहा यह खेल?
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
राज्य स्थापना दिवस पर सैकड़ों महिलाओं ने कलेक्टर जनदर्शन में लगाई गुहार, कटसीरा और भद्रापारा में अवैध महुआ शराब की बिक्री से शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक माहौल प्रभावित होने की शिकायत। आबकारी विभाग ने ग्रामीणों से सहयोग मांगा, शीघ्र कार्रवाई का दिया भरोसा।
कोरबा ACGN:- छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जहां प्रदेशभर में उत्सव और विकास की बातें हो रही थीं, वहीं कोरबा जिले के ग्रामीण इलाकों से महिलाओं की एक ऐसी आवाज सामने आई, जो गांवों में बढ़ती नशाखोरी और अवैध शराब बिक्री की समस्या को उजागर कर रही है।
कटघोरा विकासखंड के ग्राम पंचायत कटसीरा की सैकड़ों महिलाएं सरपंच एवं उपसरपंच नरोत्तम रजवाड़ों के नेतृत्व में नशामुक्त गांव की मांग लेकर कलेक्टर कार्यालय के जनदर्शन में पहुंचीं और कलेक्टर से अवैध महुआ शराब के निर्माण एवं बिक्री पर रोक लगाने की गुहार लगाई।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि एक ओर शासन नशामुक्ति अभियान चलाकर लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक कर रहा है, वहीं दूसरी ओर गांवों में अवैध कच्ची महुआ शराब का निर्माण और बिक्री लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। गांवों के चौक-चौराहों से लेकर स्कूलों के आसपास तक शराब पीने वालों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहने की शिकायत की गई है। महिलाओं के मुताबिक कई जगहों पर राशन दुकानों से ज्यादा चखना बेचने वाली दुकानें दिखाई देने लगी हैं, जहां दिनभर नशेड़ियों की आवाजाही बनी रहती है।
ग्राम पंचायत कटसीरा की महिलाओं ने विशेष रूप से शासकीय हाई स्कूल और शासकीय माध्यमिक शाला के आसपास की स्थिति पर चिंता जताई। उनका आरोप है कि विद्यालय से लगभग 100 मीटर की दूरी पर कच्ची महुआ शराब बनाकर बेची जा रही है। शराब पीकर कुछ लोग गाली-गलौज और विवाद करते हैं, जिससे गांव का माहौल अशांत हो रहा है। इसका सीधा असर स्कूली बच्चों और छात्राओं की सुरक्षा तथा पढ़ाई पर पड़ने की आशंका है। महिलाओं का कहना है कि स्कूल आने-जाने वाली छात्राएं असहज महसूस करती हैं और अभिभावकों में भी चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों ने चोरी और संपत्ति को नुकसान पहुंचने जैसी घटनाओं की शिकायत भी की है।
महिलाओं ने बताया कि ग्राम पंचायत स्तर पर नशामुक्ति अभियान चलाकर लोगों को समझाइश दी जा रही है। महिला स्व सहायता समूह और ग्रामीणों की ओर से भी लोगों को शराब, गांजा और अन्य मादक पदार्थों से दूर रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि गांव में स्वस्थ, सुरक्षित और शांतिपूर्ण पारिवारिक वातावरण बनाया जा सके। लेकिन अभियान के बावजूद कुछ लोगों द्वारा अवैध शराब निर्माण और बिक्री जारी रखने की शिकायत सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब ऐसे लोगों को शराब बनाना बंद करने की समझाइश दी जाती है तो कुछ लोग विरोध करते हुए जनजातीय समुदाय को पांच लीटर शराब बनाने की छूट मिलने की बात कहते हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से स्पष्ट नियमों के तहत जांच और कार्रवाई की मांग की है।
इसी के साथ दूसरे ग्राम पंचायत भदरा पारा सेबी सैकड़ो महिलाएं अवश्य शराब पर रोक लगाने के लिए जनदर्शन में शिकायत करने पहुंची ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार ग्राम भद्रापारा में भी स्थिति इससे अलग नहीं है।
वहां भी चौक-चौराहों पर शराब और नशाखोरी को लेकर महिलाओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि गांवों में नशे का बढ़ता चलन केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति, बच्चों के भविष्य, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक वातावरण से जुड़ी गंभीर समस्या बनता जा रहा है।
इस मामले में आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त रवि शंकर यादव और उप सहायक आयुक्त मनोज राठौर से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि विभाग द्वारा समय-समय पर अवैध शराब के विरुद्ध छापामार कार्रवाई की जाती है। हालांकि कुछ स्थानों पर ग्रामीणों का पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाने और पंचनामा सहित अन्य कार्रवाई में सहयोग नहीं करने के कारण दिक्कतें आती हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि यदि कहीं अवैध शराब का निर्माण या बिक्री हो रही है तो इसकी सूचना विभाग को दें और कार्रवाई के दौरान आवश्यक सहयोग करें। उन्होंने महिलाओं की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करने का भरोसा भी दिया।
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गांवों में नशामुक्ति अभियान चलाया जा रहा है, तब स्कूलों के आसपास शराब की अवैध बिक्री और नशाखोरी की शिकायतें आखिर क्यों सामने आ रही हैं? क्या केवल जागरूकता अभियान चलाने से नशे पर रोक लग पाएगी, या फिर प्रशासन, आबकारी विभाग, पुलिस और पंचायत को मिलकर नियमित निगरानी तथा प्रभावी कार्रवाई भी करनी होगी?
आज गांवों से लेकर नगरीय क्षेत्रों तक एक और समस्या तेजी से दिखाई दे रही है। कई चौक-चौराहों और मुख्य मार्गों पर ठेले लगाकर अथवा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर दुकानें संचालित की जा रही हैं। कुछ स्थानों पर चखना बेचने के नाम पर दुकानें खुली हैं, तो कहीं दुकानों के बगल में कमरे बनाकर अवैध रूप से शराब पीने की व्यवस्था किए जाने की शिकायतें भी मिलती हैं। हालांकि हर चखना दुकान को अवैध शराब बिक्री से जोड़ना उचित नहीं होगा, लेकिन जहां ऐसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां प्रशासन और संबंधित विभागों की जांच जरूरी है। शासकीय जमीन पर अतिक्रमण, बिना अनुमति दुकान संचालन और सार्वजनिक स्थानों पर शराबखोरी जैसी समस्याओं पर भी अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए।
नशामुक्ति का अभियान केवल पोस्टर, रैली और शपथ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी असली सफलता तब होगी, जब गांव की महिलाएं बिना डर के अपनी बात रख सकें, बच्चे सुरक्षित वातावरण में स्कूल जा सकें और चौक-चौराहों पर नशाखोरी तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण दिखाई दे। अब देखना यह है कि जनदर्शन में पहुंची सैकड़ों महिलाओं की आवाज प्रशासन तक पहुंचकर कितनी जल्दी धरातल पर कार्रवाई में बदलती है। आखिर गांवों को नशामुक्त बनाने की जिम्मेदारी केवल महिलाओं और महिला समूहों की ही क्यों रहे? शासन की मंशा को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
महिलाओं का अपने घर-परिवार की जिम्मेदारियां छोड़कर सैकड़ों की संख्या में सड़क पर उतरना और शासन-प्रशासन के दरवाजे पर नशे से मुक्ति की गुहार लगाना अपने आप में एक गंभीर संदेश है। यह तस्वीर केवल दो गांवों की समस्या नहीं, बल्कि प्रदेश में बढ़ती नशाखोरी और बिगड़ते सामाजिक माहौल की ओर इशारा करती है। जब गांव की माताएं-बहनें अपने बच्चों के भविष्य और परिवार की सुरक्षा के लिए प्रशासन से गुहार लगाने को मजबूर हो जाएं, तो समझना होगा कि समस्या अब सामान्य नहीं रही। सवाल यह है कि आखिर नशामुक्ति के संकल्प और धरातल की हकीकत के बीच इतनी बड़ी खाई क्यों है? छत्तीसगढ़ को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने का समय अब आ गया है। अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर सख्त रोक के साथ शराबबंदी की दिशा में ठोस पहल होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी को नशे की नहीं, शिक्षा, संस्कार और सुरक्षित भविष्य की राह मिले। अब महिलाओं की गुहार को सिर्फ आवेदन समझकर फाइलों में दबाने का नहीं, बल्कि उसे बदलाव की चेतावनी मानकर कार्रवाई करने का समय है।
प्रदीप मिश्रा
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