बाढ़ ने खोली व्यवस्था की पोल, अब जवाब और स्थायी समाधान की मांग
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गंजाम, ओडिशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनिल कुमार चौधरी, गंजाम
अर्नव तूफान और भारी बारिश से गंजाम-गजपति में तबाही का दावा, जल निकासी, बांधों से पानी छोड़ने और मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था पर सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल।
बरहमपुर ACGN:- लगातार समुद्री तूफानों और ‘अर्नव’ के प्रभाव से दक्षिणी ओडिशा के गंजाम और गजपति जिलों में बाढ़ की स्थिति को लेकर अब प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। भारी बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद कई क्षेत्रों में जलभराव और जनजीवन प्रभावित होने की बात सामने आई है। इस स्थिति को लेकर गंजाम जिले के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने नाराजगी जताते हुए जल निकासी व्यवस्था में सुधार और भविष्य में ऐसी आपदा से बचाव के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
गंजाम जिले के पात्रापुर, धाराकोट, सानखेमुंडी, भंजनगर, शेरगढ़, चिकिटी, दिगपहंडी, सोरढा, पुरुषोत्तमपुर और जगन्नाथ प्रसाद सहित कई ब्लॉक प्रभावित बताए गए हैं। संगठनों के अनुसार, बरहमपुर शहर के कई इलाकों में भी दो से तीन फीट तक पानी भर गया। उनका दावा है कि 318 पंचायतों के 1,010 गांवों और बड़ी आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं कराई गई है।
जलाशयों से पानी छोड़ने और चेतावनी व्यवस्था पर सवाल
सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि रुसिकुल्या, हरभंगी, दाहा, बाघलटी और घोडाहाड़ जलाशयों में जलस्तर बढ़ने के बाद कई गेट खोले गए, लेकिन लोगों को समय पर पर्याप्त चेतावनी नहीं मिल पाई। उनके अनुसार, अलग-अलग जलाशयों से निकला पानी नदियों और नालों के रास्ते आसपास के क्षेत्रों में पहुंचा, जिससे सोरा, धाराकोट, शेरगढ़ और दिगपहंडी सहित कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी।
बरहमपुर में केरंडीतोला की ओर से आया पानी दक्षिणापुर जलाशय के रास्ते सपुआ और संखुआ नालों में पहुंचा, जिससे शहर के निचले इलाकों में जलभराव बढ़ने की बात कही गई है। संगठनों ने सवाल उठाया कि जब गोपालपुर में डॉप्लर मौसम रडार मौजूद है, तो समय रहते मौसम की सटीक जानकारी और बाढ़ की चेतावनी लोगों तक क्यों नहीं पहुंच सकी?
स्थायी जल निकासी और भूमिगत बिजली व्यवस्था की मांग
बैठक में संगठनों ने बरहमपुर शहर में तत्काल सीवरेज व्यवस्था विकसित करने, बरहमपुर-छत्रपुर-गोपालपुर क्षेत्र में भूमिगत बिजली आपूर्ति के लिए केबल बिछाने और गोपालपुर डॉप्लर रडार को नियमित एवं पूरी क्षमता से संचालित करने की मांग रखी।
इसके साथ ही शहर के बहना नाल और सपुआ नाल पर हुए कथित अतिक्रमण हटाने तथा कटक के तलदंडा नहर ढांचे की तर्ज पर इन दोनों नालों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और जल निकासी व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई। संगठनों ने बताया कि PLA-35/2011 मामले में हाईकोर्ट द्वारा 324 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कानूनी आदेश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
आसिका शहर को बाढ़ से राहत दिलाने के लिए गुंणटापाड़ा और झगडेइ नदी के बीच 200 फीट चौड़ा नदी संपर्क मार्ग बनाने की मांग भी सामने आई। इसके अलावा रुसिकुल्या नदी में अनावश्यक रेत निकासी को भी बाढ़ की समस्या से जुड़ा एक संभावित कारण बताते हुए इस पर नियंत्रण की जरूरत जताई गई।
किसानों के नुकसान की भरपाई और मुख्यमंत्री से समीक्षा बैठक की मांग
बाढ़ से किसानों की फसलें प्रभावित होने की बात कहते हुए संगठनों ने नुकसान का उचित मुआवजा, प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता, किसान परिवारों के विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा और भविष्य में कर्ज राहत जैसे कदम उठाने की मांग की।
गंजाम जिला विकास मंच, प्रगतिशील उत्कल समाज, ओडिशा विकास मंच, अभिभावक महासंघ, स्वाभिमान ओडिशा सहित अन्य संगठनों ने मुख्यमंत्री की निगरानी में गंजाम जिले की स्थिति पर तत्काल समीक्षा बैठक बुलाने की मांग की। उनका कहना है कि जनता की राय और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर स्थायी बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
बैठक में ये लोग रहे शामिल
इस बैठक में गंजाम जिला विकास मंच के संयोजक राजेंद्र पंडा, समन्वयक विनोद ठाकुर, प्रगतिशील उत्कल समाज के संयोजक एवं अधिवक्ता सरोज रंजन पटनायक, राज्य संपादक मानस रंजन पटनायक, ओडिशा विकास मंच के समन्वयक प्रीतिश पाणिग्राही, ओडिशा उपभोक्ता सहकारी संघ के निदेशक रवींद्र कुमार सामल, राज्य कार्यकारी समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेश चंद्र त्रिपाठी, स्वाभिमान ओडिशा के कार्यकर्ता एवं ओडिशा अभिभावक महासंघ के मधुसूदन साहू, सामाजिक कार्यकर्ता सूर्य नारायण बेहरा, मिर्जा बेगम, संजय कुमार त्रिपाठी और डॉ. रवींद्रनाथ पाणिग्राही सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
बड़ा सवाल यह है कि हर साल बाढ़ के बाद राहत और बचाव की चर्चा तो होती है, लेकिन स्थायी जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था कब जमीन पर उतरेगी? प्रभावित लोगों की सुरक्षा, किसानों के नुकसान की भरपाई और भविष्य की आपदाओं से बचाव के लिए अब ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
प्रदीप मिश्रा
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